bhagalpur news. रेणु संवेदनाओं के कथाकार थे, जनमानस के हृदय में हैं जीवित

मारवाड़ी कॉलेज में रेणु: मारे गए गुलफाम विषय पर बुधवार को संगोष्ठी आयोजित की गयी. मौके पर मुख्य वक्ता सह पीजी हिंदी विभाग के हेड प्रो शिव शंकर मंडल ने कहा कि रेणु संवेदनाओं के कथाकार थे

मारवाड़ी कॉलेज में रेणु: मारे गए गुलफाम विषय पर बुधवार को संगोष्ठी आयोजित की गयी. मौके पर मुख्य वक्ता सह पीजी हिंदी विभाग के हेड प्रो शिव शंकर मंडल ने कहा कि रेणु संवेदनाओं के कथाकार थे. वे अपने साहित्य में किसी प्रकार के कृत्रिम हस्तक्षेप के पक्षधर नहीं थे. उनका लेखन समाज के यथार्थ को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है, इसी कारण वे आज भी जनमानस के हृदय में जीवित हैं. वहीं, डॉ सुबोध मंडल ने कहा कि रेणु स्वयं मारे गए गुलफाम के जीवंत रूप हैं. उन्होंने आदिकाल को वीरगाथाकाल बताते हुए कहा कि रेणु जी की जीवनशैली अत्यंत सरल और अद्भुत थी. युवा वर्ग को उनके साहित्य को गंभीरता से पढ़ने और समझने की आवश्यकता है. प्राचार्य प्रो संजय झा ने रेणु के लेखन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. कहा कि कहा कि रेणु का साहित्य गांव, समाज और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज है. डॉ आलोक ने रेणु जी के साहित्यिक प्रसंगों की संवेदनशीलता और प्रासंगिकता की सराहना की. डॉ ब्रजभूषण तिवारी ने फणीश्वरनाथ रेणु के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान तथा आंचलिकता की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. मौके पर प्रो प्रतिभा राजहंस, डॉ कमलापति, डॉ श्वेता, डॉ स्वस्तिका दास, डॉ प्रभात कुमार, डॉ रवि शंकर कुमार, डॉ आशीष कुमार मिश्रा, डॉ संजय कुमार जायसवाल, डॉ जूही सिंह, डॉ प्रमिला कुमारी, डॉ सुपेंद्र यादव आदि मौजूद थे.

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Published by: Atul kumar

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