bhagalpur news. परशुराम के क्रोध को प्रभु श्रीराम ने अपनी विनम्रता और मुस्कुराहट से जीता

परशुराम के क्रोध को भी प्रभु श्रीराम ने अपनी विनम्रता और मुस्कुराहट से जीत लिया.

परशुराम के क्रोध को भी प्रभु श्रीराम ने अपनी विनम्रता और मुस्कुराहट से जीत लिया. क्रोध को प्रेम से ही जीता जा सकता है. क्रोध से कभी नहीं. उक्त बातें रवि किशन महाराज ने शनिवार को मानस सत्संग सद्भावना समिति की ओर से मारवाड़ी पाठशाला परिसर में आयेाजित सद्भावना सम्मेलन के पांचवें दिन प्रवचन करते हुए कही. रामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि राम नाम वह अमृत है, जिससे अमरत्व की प्राप्ति होती है. आपको कथा केवल इसलिए नहीं सुनायी जाती कि आपको ज्ञान मिले. बल्कि इसके सूत्रों से जीवन की व्यथा समाप्त हो. पंकज रामायणी ने कहा कि जहां भी कथा होती है, किसी ने किस रूप में हनुमान जी जरूर आते हैं. नीलम शास्त्री ने कहा कि जब हम अज्ञान रूपी निद्रा से जाग जायें, तब प्रभु की कृपा स्वतः हो जाती है. संसार को देखेंगे तो वासना जागेगी और संसार बनाने वाले के रूप को देखेंगे तो उपासना जागेगी. जब क्रोध आता है, तो हम अज्ञान की पराकाष्ठा को पार कर देते हैं. कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष मृत्युंजय प्रसाद सिंह ने की, जबकि संचालन महामंत्री श्वेता सिंह ने किया. इस मौके पर अमरेंद्र कुमार सिन्हा, हरि किशोर सिंह कर्ण, रत्नाकर झा, महेश राय, प्रमोद मिश्रा, सुनील चटर्जी, सुनिता सिंह, विनीता मिश्रा,पंडित अरुण शुक्ला, चंदन कर्ण, बलजीत सिंह, कुणाल सिंह आदि उपस्थित थे.

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By NISHI RANJAN THAKUR

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