हास्य-व्यंग्य की साहित्यिक संस्था बगुला मंच द्वारा हिंदी पखवाड़ा पर रविवार को ईश्वरनगर भागलपुर में काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ प्रेमचंद पांडेय ने की. मुख्य अतिथि के रूप में कवि त्रिलोकी नाथ दिवाकर उपस्थित रहे. संचालन संस्था के सचिव धीरज पंडित ने किया.
कार्यक्रम के दौरान डॉ प्रेमचंद पांडेय ने कहा कि हिन्दी महज भाषा ही नहीं, बल्कि भारत की पुरातन संस्कृति का प्रतीक है. कहा कि संकुचित मानसिकता और दकियानूसी सोच के कारण हिन्दी अब तक अपने अपेक्षित लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई है. गोष्ठी की शुरुआत लोक गायक सह कवि संजीव कुमार झा की सरस्वती वंदना से हुयी. सोहन मंडल ने अपनी कविता हिन्दू हिन्दी हिंदुस्तान इसमें बसते सबके प्राण से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. वहीं कवि सुनील कुमार पटेल ने कहा कि हिन्दी हिन्दी हम पुकार रहें, अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ा रहें. युवा शायर इकराम हुसैन शाद ने गंगा-जमुनी तहजीब पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दी और उर्दू दोनों सगी बहनें हैं. कवि अभय कुमार भारती ने भी हिन्दी को आत्मसम्मान से जोड़ते हुए इसे अपनाने की अपील की. मंच के सचिव धीरज पंडित ने अपने मुक्तक में हिन्दी को सहज और समभाव वाली भाषा बताया.
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