बदलते मौसम से सांस के रोगियों की संख्या बढ़ी है. दमा-खांसी, ब्लड प्रेशर संबंधित बीमारी रोगियों में बढ़ रही है. वायरल फीवर का संक्रमण तेजी से हाे रहा है. इसे लकर चिकित्सकों ने अलर्ट जारी किया है. सर्दी का मौसम शुरू होते ही अस्पतालों के ओपीडी में सामान्य फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के ओपीडी में 1800 से अधिक मरीजों की संख्या दर्ज की गयी है. एक सप्ताह पहले तक यहां 1000 से कम मरीज आ रहे थे. बुधवार को भी 1800 से अधिक मरीजाें की संख्या रही. इसमें मेडिसिन अर्थात सर्दी-खांसी, वायरल फीवर, ब्लड प्रेशर व हृदय के मरीजों की संख्या बढ़ी इसके बाद ऑर्थोपेडिक व चर्म रोग के मरीजों की संख्या थी. सदर अस्पताल के ओपीडी से लेकर निजी क्लिनिक में आनेवाले मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. 50 फीसदी से अधिक मरीजों में सामान्य फ्लू के लक्षण मिले. वरीय चिकित्सकों के अनुसार इस समय सजग रहने से ही लोग दमा-खांसी, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकते हैं. हृदय रोग व लकवा की आंशका बढ़ गयी है. शरीर को गर्म कपड़ों से ढकने की कोशिश करें. बाइक चलाने वालों को अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए. वरीय फिजिशियन डॉ विनय कुमार झा ने बताया कि ठंड अचानक बढ़ने से किसी प्रकार की अनदेखी खतरनाक है. दिनचर्या व खान-पान में लापरवाही से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं. मौसम में बदलाव का सबसे ज्यादा असर बच्चों व बुजुर्गों पर होता है. बच्चों व बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट व अस्थमा के मरीज सावधानी बरतें. सर्दी के मौसम में संक्रमण जल्दी हावी हो जाता है. इसलिए ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि अभी अधिकतर क्लिनिक व अस्पताल में बीमार बच्चों में ब्रांकियोलाइटिस-वायरल निमोनिया व कोल्ड डायरिया के शिकायत आ रहे हैं. वायरल निमोनिया छोटे बच्चों को अधिक होता है. खासकर दो साल के नीचे के बच्चों में. यह सर्दी-जुकाम से शुरू होता है. बच्चा हांफने लगता है. इसमें एंटिबाइटिक काम नहीं करता है. इनहेलर की जरूरत पड़ती है. अभिभावक को धैर्य बनाये रखना चाहिए. कोल्ड डायरिया में ओआरएच व जिंक पिलाना चाहिए, जेएलएनएमसीएच फिजिशियन सह सहायक प्राध्यापक डॉ कपिल कुमार सिंह ने बताया कि बदलते मौसम को ट्रांजिशन फेज कहते हैं. इस समय सिरदर्द, तनाव, नाक से पानी, ब्रांकाइटिस, राइनाटिस के लक्षण दिखने लगते हैं. आदमी सुस्त व बीमार पड़ जाता है. जो दमा की बीमारी से ग्रसित रहते हैं, उसमें लक्षण तीव्र हो जाता है. इस तरह का प्रभाव प्रदूषण से हो रहा है. सामान्य मौसम का मजा लेने की बजाय सावधानी के लिए सुबह व शाम को गर्म कपड़ा जरूर पहनना चाहिए. स्नान करने में हल्का गर्म पानी का इस्तेमाल करना चाहिए. बीमार लोगों को चिकित्सक के अनुसार ही दवा लेनी चाहिए. ऐसे रखें अपना ख्याल चिकित्सकों ने बताया कि सुबह व शाम को पूरे शरीर को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें. गुनगुना पानी व गर्म खाद्य पदार्थ का सेवन करें. शीतल पेय पदार्थ का सेवन किसी भी हाल में ना करें. ताजा खाना खाएं बासी खाने से परहेज करें. मौसमी साग-सब्जी वह फल का अधिक से अधिक प्रयोग करें. अदरक व दालचीनी वाली चाय का इस्तेमाल करें. साफ व शुद्ध पानी भरपूर मात्रा में पियें.
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