Bhagalpur News: लखीसराय व कटिहार के थानाध्यक्ष के वेतन पर रोक लगाने का आदेश

भागलपुर व्यवहार न्यायालय के विशेष निगरानी अदालत ने दोनाें जिले के एसपी को लिखा पत्र

– भागलपुर व्यवहार न्यायालय के विशेष निगरानी अदालत ने दोनाें जिले के एसपी को लिखा पत्र- घूसखोरी के मामलों में आरोपितों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने में लापरवाही बरतने पर की सख्ती

– पूर्व में कोर्ट ने समन, जमानती और फिर गैर जमानती वारंट के बाद स्पष्टीकरण की कार्रवाई की थी

संवाददाता, भागलपुर

रिश्वतखोरी (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) के मामलों में आरोपितों को कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं कराने और आरोपितों के विरुद्ध निर्गत गैर जमानती वारंट का तामिला नहीं कराना राज्य के दो थानाध्यक्षों को भारी पड़ गया. भागलपुर व्यवहार न्यायालय के विशेष निगरानी अदालत एडीजे-5 के न्यायाधीश ने लखीसराय थाना और कटिहार नगर थाना के थानाध्यक्षों की दो अलग-अलग मामलों में कोर्ट के आदेश की अवमानना करने का आरोप लगाया है. दोनों पुलिस जिलों के एसपी को संबंधित थानाध्यक्षों का वेतन धारित करने का निर्देश दिया है. निगरानी कोर्ट ने लखीसराय और कटिहार पुलिस जिला के एसपी को इस संबंध में पत्र भी लिखा है.

बता दें कि रिश्वखोरी के दो मामलों में चल रही सुनवाई के दौरान विशेष निगरानी अदालत ने दोनों आरोपितों के विरुद्ध समन, इसके बाद जमानती वारंट और फिर गैर जमानती वारंट जारी किया था. कई बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी जब गैर जमानती वारंट का तामिला प्रतिवेदन कोर्ट को नहीं सौंपा गया तो लखीसराय थाना और कटिहार नगर थाना के थानाध्यक्षों को पत्र लिख कर सशरीर कोर्ट में उपस्थित होकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना को लेकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया था. बावजूद दोनों थानाध्यक्षों द्वारा न तो तामिला प्रतिवेदन कोर्ट में समर्पित किया और न ही मांगे गये स्पष्टीकरण का जवाब दिया गया. इस पर कोर्ट ने दोनों थानाध्यक्षों के विरुद्ध वेतन धारित करने की कार्रवाई की है.

लखीसराय में 28 साल पूर्व दर्ज मामले में जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट

मामला लखीसराय टाउन थाना में 28 साल पूर्व दर्ज कांड संख्या 244/97 का है. मामले में पूर्व में आरोपित को कोर्ट के समक्ष उपस्थित कराने के लिए समन, जमानती वारंट और गैर जमानती वारंट निर्गत किया जा चुका है. लखीसराय थानाध्यक्ष की ओर से अब तक गैर जमानती वारंट का तामिला प्रतिवेदन कोर्ट में नहीं दिया गया है. कोर्ट ने इसे अवमानना माना और विगत 6 फरवरी 2025 लखीसराय के टाउन थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण की मांग की थी. जिसका जवाब थानाध्यक्ष द्वारा अब तक कोर्ट को नहीं दिया गया.

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