bhagalpur news. इराक से 18 दिनों के बाद मरीन इंजीनियर का शव पहुंचा भागलपुर, परिजनों में कोहराम

मरीन इंजीनियर का पार्थिव शरीर पहुंचा भागलपुर.

– देर रात ही परिजन इशाकचक से शव को लेकर दाह संस्कार के लिए रवाना हुए परिजन-खोर अल जुबैर पोर्ट के पास तेल लोड करते ही बारूद से भरा मोटरबोट ने जहाज में मार दी थी टक्कर

ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान इराक में मारे गये सन्हौला प्रखंड के रानी बामिया गांव निवासी मरीन इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार रात भागलपुर पहुंचा. मशाकचक स्थित आवास पर ताबूत खुलते ही परिजनों के रूदन क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया. परिजनों ने तुलसी दल और गंगा जल देने की प्रक्रिया की, फिर शव को ले कर दाह संस्कार के लिए बरारी गंगा घाट ले जाया गया. मृतक की पत्नी, पुत्री व अन्य परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था.

18 दिन बाद घर पहुंचा मरीन इंजीनियर का शव

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार देवनंदन प्रसाद सिंह अमेरिकी कंपनी में कार्यरत थे. वे चीफ असिस्टेंट इंजीनियिर पद पर कार्यरत थे. पिछले कई वर्षों से वे ऑफिस ड्यूटी पर ही रहते थे. लेकिन इन दिनों उन्हें जहाज पर भेज दिया गया था. 11 मार्च को अमेरिकी जहाज इराक के बसरा बंदरगाह पर पहुंचा था. यहां से जहाज में तेल लोड करने के बाद जहाज सिंगापुर जाना था. तेल लोड कर जहाज सिंगापुर के लिए रवाना हो गया था. इसी बीच खोर अल जुबैर पोर्ट के पास तेल लोड करते ही बारूद से भरे एक मोटरबोट ने जहाज में टक्कर मार दी. घटना के वक्त जहाज पर 28 लोग सवार थे. उनमें से सिर्फ देवनंदन की ही मौके पर मृत्यु हो गयी. मृत अवस्था में देवनंदन अपने यूनिफार्म कोर्ट पेंट में थे. शरीर में सूजन था और चेहरा काला हो गया था.

हादसे के बाद शव को भेजा गया टर्की

परिजनों ने बताया कि हादसे के बाद शव को टर्की भेजा गया था. जहां से मंगलवार को दिल्ली पहुंचा. दिल्ली इंडिगो से दोपहर 3.05 पर शव को परिजनों ने पटना एयरपोर्ट पर रिसीव किया. वहां से भागलपुर लाया गया. परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह कुशवाहा, समाजसेवी दीपक सिंह और राजीव सिंह तीनों देवनंदन प्रसाद के रिश्ते में ममिया ससुर लगते हैं. प्रवीण सिंह कुशवाहा के घटना के बाद से लगातार शव को भागलपुर लाने के लिए प्रयासरत थे. दीपक सिंह ने कहा कि देवनंदन सामाजिक व्यक्ति थे.

उठाया सवाल, आखिर 28 में से सिर्फ देवनंदन की ही मौत क्यों

दीपक सिंह ने कहा कि शिप पर कुल 28 लोग थे लेकिन सवाल उठता है कि आखिर देवनंदन की मौत क्यों हो गयी. मिडिल इस्ट की हालत जब इतनी खराब थी तो तेल कंपनी और उसके संबंधित देश ने इराक से तेल उठाव करने की योजना क्यों बनायी. दीपक सिंह ने कहा कि संबंधित लोगों से इस तरह का सवाल पूछना चाहिए. दीपक सिंह ने बताया कि देवनंदन उसके इकलौते भगिन दामाद थे. मालूम हो कि देवनंदन प्रसाद का पुत्र क्षितिज जापान में इंजीनियर हैं तो पुत्री कोमल इन दिनों एमबीबीएस कर रही है. इंजीनियर देवनंदन की तीन बहनें पार्वती देवी, रंजू देवी और मंजू देवी हैं.

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By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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