टीएमबीयू में एक अधिकारी को एक पद का मामला तूल पकड़ने लगा है. इसे लेकर छात्र राजद व विवि एनएसएस समन्वयक आमने-सामने हैं. बुधवार को एक पद व एक अधिकारी की मांग को लेकर छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा का विवि प्रशासनिक भवन के बाहर पुतला फूंका. विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता ने विवि प्रशासन पर कई गंभीर आरोप भी लगाये. छात्र राजद का कहना था कि राज्य सरकार व लोकभवन से जारी पत्र में एक अधिकारी, एक पद के निर्देश का पालन विवि में नहीं की जा रही है. प्रभारी कुलपति मनमाना रूप से कार्य कर रहे हैं. आरोप लगाया कि प्रभारी कुलपति कार्यालय में बैठकर कार्य करने के बजाय अपने चहेतों संग आवास पर दरबार लगाते हैं. आम छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के हितों की अनदेखी करते हैं. आरोप लगाया कि पीक एंड चूज पॉलिसी के तहत कार्य हो रहे हैं. कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है. मौके पर प्रवक्ता प्रभाकर कुमार, आशीष राय, देव सूरज, जीतेंद्र कुमार, गोविंद कुमार, ऋषभ राज, आनंद राज, निशांत कुमार, प्रिंस कुमार, गुंजन यादव, सागर दास आदि मौजूद थे. एनआइसी कैंप में लाखों रुपये की गड़बड़ी का लगाया आरोप
छात्र राजद के विवि अध्यक्ष लालू यादव ने कहा कि विवि एनएसएस समन्वयक डॉ राहुल कुमार को सांस्कृतिक परिषद का सचिव नियुक्त किया है. विवि में एक अधिकारी, एक पद का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है. छात्र नेता ने एनएसएस समन्वयक पर एनआइसी कैंप के दौरान लाखों रुपये की गड़बड़ी करने का भी आरोप लगाया है. कहा कि गड़बड़ी को छुपाने के लिए खुद से संचिका बढ़ाते हुए अपनी एनएसएस समन्वयक के सेवा विस्तार कराया. इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांगी की है. छात्र नेता ने कहा कि प्रभारी कुलपति सचिव पद से पदमुक्त नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा.
व्यक्ति विशेष को लक्षित करना संगठन की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता – डॉ राहुल विवि के एनएसएस समन्वयक डॉ राहुल कुमार ने कहा कि एक व्यक्ति दो पद की परिभाषा के तहत विश्वविद्यालय के लगभग सभी अधिकारी शामिल हैं, तो फिर किसी व्यक्ति विशेष को लक्षित करना किसी संगठन की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है. लगाये सभी आरोप को निराधार हैं. कहा कि भारत सरकार के राष्ट्रीय सेवा योजना मैनुअल 2006 के अनुसार जिस विश्वविद्यालय में 100 से कम इकाई है. वहां का राष्ट्रीय सेवा योजना का समन्वयक का पद पार्ट टाइम होता है. साथ ही एनएसएस का पद कोई स्टेच्युटरी पोस्ट नहीं है, जो लोग दो या दो से अधिक स्टेच्युटरी पोस्ट पर बैठे हैं, उस पर विचार हो. सांस्कृतिक परिषद के सचिव का जो पद प्राप्त हुआ है, वह पद नहीं, बल्कि एक काउंसिल है, इसके अध्यक्ष डीएसडब्ल्यू होते हैं. सचिव सिर्फ कार्यकारी अधिकारी होता है. राष्ट्रीय एकता शिविर के संदर्भ में दिये गये बयान भ्रामक हैं, क्योंकि विश्वविद्यालय को भारत सरकार से कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है, ना ही विश्वविद्यालय का एक भी रुपया उसमें लगा है, जो राशि प्राप्त हुई है. एकता शिविर के कैंप डायरेक्टर की अनुमति से व्यय किया गया है. उसका यूटिलाइजेशन भारत सरकार को भेज दिया गया है.