Bhagalpur news पीरपैंती दियारा में मखाना की खेती शुरू, किसान होंगे समृद्ध

पीरपैंती दियारा क्षेत्र के कालीप्रसाद गांव व फेकू टोला गांव के किसान मो नसीम अहमद ने 12 एकड़ में मखाना की खेती शुरू की

पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत दियारा क्षेत्र के कालीप्रसाद गांव व फेकू टोला गांव के किसान मो नसीम अहमद ने 12 एकड़ में मखाना की खेती शुरू की है. किसान ने बताया कि पीरपैंती के दियारा क्षेत्र में प्राय: एक फसली खेती होती है. आय सीमित होने से किसानों की हालत हमेशा दयनीय बनी रहती है. वह कृषि विज्ञान केंद्र सबौर के मार्गदर्शन में सबौर मखाना-1 की खेती प्रारंभ की. फसल की स्थिति देखने पीरपैंती पहुंचे कृषि विज्ञान केंद्र सबौर वैज्ञानिक डॉ जेयाउल होदा ने फसल का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि खेती अगर सफल रही तो इस क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार में सुधार होगा. उन्होंने बताया कि सबौर मखाना-1 बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की ओर से विकसित उन्नत प्रभेद है, जो अन्य पारंपरिक प्रभेदों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक उपज देने की क्षमता रखता है. इस वर्ष पीरपैंती के दियारा क्षेत्र में यह प्रयोग पूर्णतः सफल रहा, तो यह क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. मखाना की खेती में प्रति हेक्टेयर लगभग 1.25 लाख रुपये उत्पादन लागत आती है, जबकि इससे कुल आय लगभग पांच लाख रुपये प्राप्त हो सकती है. क्षेत्र के किसान फसल को देखकर उत्साहित हैं. अगले वर्ष इस खेती को अपनाने की इच्छा जता रहे हैं. किसान बंधु मखाना की उन्नत खेती के लिए नवंबर के अंतिम सप्ताह में नर्सरी/बिचड़ा डालें. तैयार बिचड़े की रोपाई 15 जनवरी के आसपास तालाब अथवा जलाशय में कर दें. समय पर प्रबंधन करने से फसल का विकास अच्छा होता है तथा 15 जुलाई तक इसकी हार्वेस्टिंग पूर्ण कर ली जाती है. कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर डॉ डीआर सिंह ने बताया कि सबौर मखाना-1 विश्वविद्यालय की ओर से विकसित उन्नत प्रभेद है. विश्वविद्यालय के सतत प्रयासों से ही मखाना को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जो इस फसल की विशिष्ट पहचान व गुणवत्ता का प्रतीक है. विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे सभी क्षेत्रों जहां बाढ़ से केवल एक फसली खेती संभव हो पाती है, वहां मखाना की खेती को स्थापित करना है. यह प्रयोग सफल रहता है, तो इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार होगा तथा उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. कुलपति के निर्देशन में इस वर्ष सबौर मखाना-1 का प्रसार 25 एकड़ क्षेत्र में किया गया है. आने वाले वर्षों में इसे और अधिक गति प्रदान की जायेगी. कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर किसानों को मखाना की उन्नत खेती के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने व दियारा क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने बताया कि बाढ़ से पहले इस फसल की हार्वेस्टिंग हो जायेगी, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकेगा.

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By JITENDRA TOMAR

JITENDRA TOMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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