इस बार माघी पूर्णिमा रविवार एक फरवरी को है. पूर्णिमा की तिथि प्रात: 5:52 बजे शुरू होकर समापन दो फरवरी को रात्रि 3:38 बजे हो रहा है. उदया तिथि के अनुसार माघी पूर्णिमा एक फरवरी को होगी और इसी दिन जिले के विभिन्न स्थानों पर अनुष्ठान व अन्य धार्मिक आयोजन होंगे. पंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि का आरंभ एक फरवरी को प्रातः 5: 52 बजे होगा, जबकि समापन दो फरवरी को रात्रि 3:38 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार मघी पूर्णिमा एक फरवरी को होगी. वहीं पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय मिथिला पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि का आरंभ एक फरवरी को सुबह 3:58 से शुरू होकर दो फरवरी को रात्रि 2:45 तक रहेगा. पुष्प नक्षत्र और प्रीति योग एवं रवि पुष्प नक्षत्र में मनाया जायेगा. इस दिन लक्ष्मी नारायण की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने का विधान है. माघी पूर्णिमा के दिन है, एक माह तक कल्पवास माघ महीने के गंगा स्नान का समापन होगा.
माघ पूर्णिमा का पुण्यफल पाने के लिए पूरे दिन विधि-विधान से व्रत रखें. माघ पूर्णिमा की शाम को उगते हुए चंद्र देवता को विशेष रूप से दूध और जल से अर्घ देना चाहिए. माघी पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने और धार्मिक अनुष्ठान करने की मान्यता है. माघ माह में प्रतिदिन भक्तगण प्रातःकाल गंगा अथवा यमुना नदी में स्नान करते हैं. यह नित्य स्नान पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा पर समाप्त होता है. मान्यता के अनुसार इस काल में किये गये दान-पुण्य आदि धार्मिक कर्म अति शीघ्र फलित होते हैं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा और उनका गुणगान करने वाली सत्यनारायण व्रत की कथा और श्री सूक्त का पाठ करने की मान्यता है.धार्मिक आयोजन व भंडारे का होगा आयोजन
नया बाजार, सोनापट्टी समेत अन्य स्थानों पर भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित कर पूजा होगी. जिला स्वर्णकार संघ के पूर्व सचिव विजय साह ने बताया कि एक फरवरी को माघी पूर्णिमा पर सोनापट्टी में अष्टयाम संकीर्तन, महाभंडारा का आयोजन होगा. साथ ही घर-घर भगवान सत्यनारायण की पूजा-अर्चना होगी.गंगा महाआरती होगी
मां गंगा पूजन समिति मोहनपुर, नरगा की ओर से चैती दुर्गा स्थान परिसर में गंगा महाआरती होगी. आदमपुर शिव शक्ति मंदिर में माता त्रिपुर सुंदरी की पूजा विधि-विधान से होगी. नया बाजार खादी ग्रामोद्योग संघ समीप नंदू अग्रवाल के संचालन में मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा होगी.
