Ganga Water Level Bhagalpur: गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ भागलपुर के इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर दबाव बढ़ गया है. बुधवार सुबह नदी का जलस्तर 30.75 मीटर दर्ज किया गया. यह निर्धारित चेतावनी स्तर 30.60 मीटर से 15 सेंटीमीटर ऊपर है. हालांकि जलस्तर अभी खतरे के निशान 31.60 मीटर से 85 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन स्पर संख्या पांच से छह के बीच नदी के तटबंध के काफी करीब बहने से कटाव की आशंका बढ़ गयी है.
सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो नदी का दबाव तटबंध के इस संवेदनशील हिस्से पर और बढ़ सकता है. पिछले कई वर्षों से इस इलाके में बड़े स्तर पर कटाव निरोधी काम नहीं होने की बात भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रही है.
स्पर 5 से 6 के बीच नदी तटबंध के करीब, बढ़ी निगरानी
गंगा के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान वृद्धि के बाद स्पर संख्या पांच से छह के बीच नदी का दबाव स्पष्ट रूप से बढ़ा है. इस हिस्से में गंगा तटबंध के काफी नजदीक बह रही है. ऐसे में जलस्तर में मामूली वृद्धि भी तटबंध की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है.
स्थानीय लोगों की नजर अब लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है. ग्रामीणों को डर है कि यदि पानी तेजी से बढ़ा और नदी की धारा ने कटाव शुरू किया, तो स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
खासकर तटबंध से सटे गांवों में रहने वाले परिवारों के लिए यह सिर्फ जलस्तर बढ़ने की खबर नहीं है. नदी का बढ़ता दबाव उनके घर, खेत और आवागमन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है.
अधिकारी और अभियंताओं की टीम ने किया तटबंध का निरीक्षण
जलस्तर में वृद्धि की सूचना के बाद कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने अभियंताओं की टीम के साथ इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध और विभिन्न स्परों का निरीक्षण किया.
अधिकारियों ने तटबंध की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. इस दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये गये.
विभाग की सक्रियता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ के दौरान तटबंध पर किसी भी तरह की कमजोरी सामने आने पर तत्काल कार्रवाई जरूरी होती है. शुरुआती स्तर पर समस्या की पहचान होने से कटाव को नियंत्रित करने के लिए फ्लड फाइटिंग सामग्री और संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
विभाग का दावा, फिलहाल तटबंध पूरी तरह सुरक्षित
कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने बताया कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और तटबंध सुरक्षित है. विभाग की ओर से तटबंध और नदी की स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है.
उन्होंने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निबटने के लिए पर्याप्त मात्रा में फ्लड फाइटिंग सामग्री का भंडारण किया गया है. इसका मतलब है कि जलस्तर में अचानक वृद्धि या कटाव की स्थिति पैदा होने पर विभाग तत्काल बचाव कार्य शुरू कर सकता है.
हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बतायी जा रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि होने की स्थिति में निगरानी और तैयारियों को और मजबूत रखना जरूरी होगा.
कई वर्षों से बड़े कटाव निरोधी काम का इंतजार
इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के स्पर संख्या पांच से छह के बीच कटाव का खतरा स्थानीय लोगों के लिए नया नहीं है. इस हिस्से में पिछले कई वर्षों से बड़े स्तर पर कटाव निरोधी कार्य नहीं कराया गया है.
यही वजह है कि गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. नदी का दबाव बढ़ने पर केवल तत्काल बचाव सामग्री पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि संवेदनशील हिस्सों में स्थायी सुरक्षा उपायों की जरूरत भी महसूस की जा रही है.
ग्रामीणों की मांग है कि जलस्तर सामान्य होने का इंतजार करने के बजाय संवेदनशील स्थानों की नियमित समीक्षा की जाए और जहां जरूरत हो, वहां पहले से कटाव निरोधी उपाय किये जाएं.
जलस्तर बढ़ा तो गांवों पर क्या होगा असर
इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध आसपास के गांवों के लिए सुरक्षा कवच की तरह है. ऐसे में तटबंध पर बढ़ता नदी का दबाव सीधे स्थानीय आबादी की चिंता बढ़ाता है.
अगर गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से आगे बढ़कर खतरे के निशान की ओर जाता है और इसी दौरान स्पर 5 से 6 के बीच कटाव तेज होता है, तो तटबंध की सुरक्षा चुनौती बन सकती है. इसका असर आसपास के खेतों, ग्रामीण आबादी और स्थानीय आवागमन पर पड़ सकता है.
फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं बनी है और विभाग तटबंध को सुरक्षित बता रहा है. लेकिन आने वाले घंटों में जलस्तर का रुख सबसे महत्वपूर्ण रहेगा.
Ganga Water Level Bhagalpur: जलस्तर पर टिकी ग्रामीणों की नजर
गंगा का जलस्तर बुधवार को 30.75 मीटर पहुंच चुका है. यह चेतावनी स्तर से ऊपर है, जबकि खतरे के निशान तक पहुंचने में अभी 85 सेंटीमीटर का अंतर है.
यही अंतर फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए राहत की वजह है. लेकिन नदी के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए आने वाले समय में जलस्तर की हर वृद्धि महत्वपूर्ण होगी.
ग्रामीणों की नजर अब गंगा के जलस्तर के साथ स्पर संख्या पांच से छह के बीच नदी की धारा और तटबंध की स्थिति पर टिकी है. विभाग की 24 घंटे निगरानी और पर्याप्त फ्लड फाइटिंग सामग्री की उपलब्धता के बावजूद संवेदनशील हिस्से में लगातार निरीक्षण और समय पर कार्रवाई ही किसी बड़े खतरे को टालने में सबसे अहम साबित होगी.
