गोपालपुर से विपिन ठाकुर की रिपोर्ट :
गोपालपुर प्रखंड के गोपालपुर डिमाहा पंचायत के वार्ड नंबर नौ में आधा दर्जन से अधिक ईंट भट्ठों के संचालन से स्थानीय ग्रामीणों की परेशानियां चरम पर पहुंच गयी हैं. लगातार निकलने वाले धुएं, उड़ती राख और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही ने न सिर्फ स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, बल्कि इसे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए एक गंभीर खतरा माना जा रहा है.स्वास्थ्य पर पड़ रहा है बुरा असर
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह और शाम के समय इन भट्ठों से निकलने वाला जहरीला धुआं पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लेता है. इसके कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. आंखों में जलन और एलर्जी की शिकायतें बढ़ रही हैं. खेतों में उड़कर गिर रही राख और धूल से फसलों के बर्बाद होने की आशंका गहरा गयी है.क्या कहते हैं डॉक्टर?
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुधांशु कुमार का कहना है कि ईंट भट्ठों से निकलने वाले धुएं के कारण आसपास रहने वाले लोगों में सांस जनित और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के होने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है.
बदहाल सड़कें और उड़ती धूल से बच्चे परेशान
ग्रामीणों का आरोप है कि ईंटों की ढुलाई करने वाले ट्रैक्टरों और भारी वाहनों की चौबीसों घंटे आवाजाही से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं. सड़कों पर धूल की मोटी परतें जम गयी हैं, जिससे राहगीरों और विशेषकर स्कूली बच्चों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सीमित क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में ईंट भट्ठों का संचालन वायु प्रदूषण के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा देता है. लंबे समय में इसका बुरा असर इंसानी सेहत के साथ-साथ वहां की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर भी पड़ेगा.कहते हैं मुखिया प्रतिनिधि
पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सह पैक्स अध्यक्ष अजय चौधरी ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, एक ही वार्ड में कई ईंट भट्ठों के संचालन से वहां के निवासियों के स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इस वार्ड में मुख्य रूप से गरीब अल्पसंख्यक परिवार निवास करते हैं. वरीय अधिकारियों को बिना किसी देरी के तत्काल इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेने और विचार करने की जरूरत है.
