भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत इस्माईलपुर-बिंद टोली में गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. पिछले कुछ दिनों से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे और चेतावनी स्तर की ओर अग्रसर है. बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कार्यालय, नवगछिया द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे के भीतर गंगा के जलस्तर में 25 सेंटीमीटर की भारी वृद्धि दर्ज की गयी है. इस जल-संकट के बीच तटबंध की सुरक्षा के लिए चल रहा प्रशासनिक सुरक्षा कार्य अब भी अधूरा है, जिसने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
27.92 मीटर पर पहुंची गंगा, तकनीकी कार्य अधर में लटका
शुक्रवार की सुबह बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा की गई मापदंड रीडिंग के अनुसार, इस्माईलपुर-बिंद टोली में गंगा नदी 27.92 मीटर के स्तर पर बह रही थी.
नदी के बढ़ते दबाव के बीच इस अति-संवेदनशील तटबंध को सुरक्षित करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा सीट पाइलिंग (Sheet Piling) और बोल्डर क्रेटिंग (पत्थरों की जालीदार घेराबंदी) का कार्य कराया जा रहा है. लेकिन बाढ़ का पानी आने तक यह तकनीकी कार्य पूरा नहीं हो सका है. नदी का पानी अब इन अधूरे निर्माणों को अपनी चपेट में लेने लगा है, जिससे मुख्य तटबंध के टूटने और भीषण कटाव शुरू होने का डर सताने लगा है.
कोसी नदी भी दिखा रही तेवर, 24 घंटे में 15 सेमी बढ़ा पानी
गंगा के साथ-साथ जिले की दूसरी बड़ी नदी कोसी ने भी सीमावर्ती इलाकों में तबाही के संकेत देने शुरू कर दिए हैं:
- मदरौनी में उफान: नवगछिया अनुमंडल के मदरौनी में पिछले 24 घंटे के दौरान कोसी नदी के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है.
- वर्तमान जलस्तर: शुक्रवार की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी नदी 28.55 मीटर के जलस्तर पर प्रवाहित हो रही थी, जो सामान्य से काफी अधिक है.
तटवर्ती गांवों के लोगों की बढ़ीं मुश्किलें, हाई अलर्ट पर प्रशासन
दोनों प्रमुख नदियों के जलस्तर में एक साथ हो रही इस तीव्र वृद्धि से भागलपुर और नवगछिया के तटवर्ती (दियारा) गांवों में बाढ़ का सीधा खतरा पैदा हो गया है.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में वृद्धि की यही रफ्तार अगले 48 घंटों तक जारी रही, तो बाढ़ का पानी खेतों से निकलकर सीधे रिहायशी बस्तियों और घरों में प्रवेश कर जाएगा. इससे हजारों की आबादी प्रभावित होगी और पशु चारे व खाद्यान्न का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा.
वर्तमान गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं (इंजीनियरों) की टीम को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में तटबंध को टूटने से बचाया जा सके और फ्लड फाइटिंग (बाढ़ नियंत्रण) सामग्री की ऑन-स्पॉट व्यवस्था की जा सके.
