Flood Update : भागलपुर के गोपालपुर क्षेत्र में गंगा और कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. हालांकि दोनों नदियां अभी चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग ने स्थिति पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है. इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध और मदरौनी गेज स्थल पर अभियंता लगातार जलस्तर का आकलन कर रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके.
गंगा का जलस्तर 24 घंटे में 21 सेंटीमीटर बढ़ा
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार 21 जुलाई 2026 की सुबह 6 बजे इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध के स्पर संख्या-07 पर गंगा नदी का जलस्तर 28.88 मीटर दर्ज किया गया. पिछले 24 घंटों में नदी का जलस्तर 21 सेंटीमीटर बढ़ा है. वर्तमान में यह 30.60 मीटर के चेतावनी स्तर से 1.72 मीटर नीचे है, जबकि 31.60 मीटर के खतरे के निशान से भी काफी नीचे बह रही है.
तटबंध के आधार तल तक पहुंचा गंगा का पानी
जल संसाधन विभाग के अनुसार गंगा का पानी तटबंध के आधार तल तक पहुंच चुका है, लेकिन फिलहाल तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है. अभियंता लगातार स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं और जलस्तर में होने वाले हर बदलाव पर नजर रखी जा रही है. विभाग का कहना है कि फिलहाल किसी प्रकार की घबराने वाली स्थिति नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रहेगी.
मदरौनी में कोसी नदी भी चढ़ाव पर
मदरौनी गेज स्थल पर कोसी नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. मंगलवार सुबह 6 बजे यहां जलस्तर 29.01 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटों की तुलना में 10 सेंटीमीटर अधिक है. वर्तमान स्तर 30.48 मीटर के चेतावनी स्तर से 1.47 मीटर नीचे और 31.48 मीटर के खतरे के निशान से काफी कम है.
कोसी तटबंध फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित
बाढ़ नियंत्रण विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोसी नदी का पानी अभी तटबंध के आधार तल तक नहीं पहुंचा है. तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और अभियंताओं की टीम लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रही है. किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों और तकनीकी तैयारियों को भी सक्रिय रखा गया है.
2021 के रिकॉर्ड स्तर से अभी काफी नीचे
विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस्माईलपुर-बिंदटोली क्षेत्र में वर्ष 2021 में गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर 33.50 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि मदरौनी में कोसी नदी का उच्चतम बाढ़ स्तर 33.46 मीटर रहा है. वर्तमान जलस्तर इन रिकॉर्ड स्तरों से काफी नीचे है. इसके बावजूद मानसून के सक्रिय दौर को देखते हुए जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल ने चौबीसों घंटे निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है.
