Bhagalpur News. हरि, पंचलाल, रामदेव और चमकलाल का पीएम आवास रह गया अधूरा, कर्मचारी ने कहा निर्माण पूरा और अधिकारी ने मान भी लिया
पीएम आवास योजना में गड़बड़ी.
-आम व्यक्ति ने मामले को उठाया, तो शुरू हुई जांच और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस हुई जारी
संजीव झा, भागलपुरपीरपैंती प्रखंड के हरिणकोल पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के चार लाभुकों को पूरा भुगतान कर दिया गया. उनके आवास की जियो टैंगिग कर तत्कालीन आवास सहायिका ने आवास एप के माध्यम से निर्माण का कार्य पूर्ण दिखाया था, जबकि सभी आवास अधूरे थे. इनमें तीन लाभुकों का 2016-17 और एक लाभुक का मामला 2019-20 का है. इस मामले में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने का मामला जब आठ वर्ष बाद एक आवेदक ने 10 अक्तूबर, 2025 को उठाया, तब अधिकारियों ने जांच शुरू करायी और मामले की सच्चाई सामने आयी.
जिन लाभुकों के आवास मिले अधूरे
1. हरि मंडल, पीएमएवाई आईडी-बीएच 4773478 (वर्ष2016-17)2.पंचलाल मंडल, पीएमएवाई आईडी-बीएच 4774454 (वर्ष2016-17)3. रामदेव मंडल, पीएमएवाई आईडी-बीएच 4774441 (वर्ष2016-17)
4. चमकलाल मंडल, पीएमएवाई आईडी-बीएच 6149451 (वर्ष2019-20)ऐसे हुआ मामले का खुलासा
मामले में एक आवेदक अंजना सिंह ने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण के कहलगांव कार्यालय में 10.10.2025 को शिकायत दर्ज (अनन्य संख्या :- 9999901101025579692) करायी थी. इसके बाद 31 अक्तूबर, छह नवंबर, 22 नवंबर, 29 नवंबर, चार दिसंबर और 11 दिसंबर को सुनवाई हुई. पहली सुनवाई में ही लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने पीरपैंती बीडीओ से रिपोर्ट तलब की और इसके बाद पांच बार हुई सुनवाई में रिपोर्ट जमा करने के लिए मोहलत मांगी जाती रही. आखिरी सुनवाई के दिन 18 दिसंबर को रिपोर्ट जमा हुई और परिवाद की समाप्ति की गयी.
कर्मचारी से करायी गयी मामले की जांच
लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को पीरपैंती बीडीओ ने रिपोर्ट दी कि इस मामले की जांच ग्रामीण आवास सहायक व ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक से करायी गयी है. हरिणकोल ग्राम पंचायत की तत्कालीन आवास सहायिका से 13.12.2025 को पत्र भेज कर स्पष्टीकरण की मांग की गयी. लाभुक को आवास अविलंब पूर्ण करने के लिए नोटिस की गयी.जो सवाल उठ रहे
–बिना जांच कैसे हुआ अंतिम भुगतान?
–जिनके हस्ताक्षर से हुआ भुगतान उनपर क्या हुई कार्रवाई ?–जांच रिपोर्ट भी कह रही, सरकारी राशि की अवैध तरीके से हुई निकासी, तो सभी संबंधित आरोपितों के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं ?–अब तक कई मामलों में बड़ी गड़बड़ी मिल चुकी है, तो क्या अन्य जगहों पर जांच जरूरी नहीं ?–पीरपैंती के हरिणकोल के मामले में नौ साल बाद जांच हुई, क्या शिकायत दर्ज होने का इंतजार था ?
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