Eastern Railway Freight Loading: भागलपुर : रेलवे की कमाई और माल ढुलाई के आंकड़े अक्सर यात्री ट्रेनों की चर्चा के पीछे छिप जाते हैं, लेकिन चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में पूर्वी रेलवे ने माल ढुलाई के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है. 31 अगस्त 2026 तक पूर्वी रेलवे ने पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 1.85 मिलियन टन अधिक माल लादा है. इसका सीधा असर रेलवे की आय पर भी पड़ा है.
पूर्वी रेलवे का कुल माल लदान पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 39.76 मिलियन टन से बढ़कर 41.62 मिलियन टन हो गया. यानी लदान में 4.67 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी. इसी अवधि में माल ढुलाई से होने वाली आय भी 3,651.56 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,956.40 करोड़ रुपये हो गयी. रेलवे को माल ढुलाई से 304.83 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिला, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.34 प्रतिशत अधिक है.
कोयला बना माल ढुलाई की सबसे बड़ी ताकत
पूर्वी रेलवे के माल ढुलाई प्रदर्शन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कोयले की रही. कोयला लदान में इस अवधि के दौरान 10.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जहां 25.79 मिलियन टन कोयला लादा गया था, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 28.48 मिलियन टन हो गया.
यानी रेलवे ने इस अवधि में 2.69 मिलियन टन अधिक कोयला ढोया. कोयले से मिलने वाली आय में भी लदान की तुलना में अधिक तेज वृद्धि दर्ज की गयी. पिछले वर्ष की समान अवधि में कोयला परिवहन से 2,333.56 करोड़ रुपये की आय हुई थी, जो इस वर्ष बढ़कर 2,764.56 करोड़ रुपये हो गयी.
इस तरह कोयला परिवहन से रेलवे की आय में 431.01 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. यह 18.47 प्रतिशत की वृद्धि है.
लौह अयस्क और खाद्यान्न की ढुलाई भी बढ़ी
माल ढुलाई में केवल कोयले ने ही बढ़त नहीं बनायी है. अन्य प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई में भी वृद्धि दर्ज की गयी है. इसमें लौह अयस्क की लदान में 45.31 प्रतिशत और खाद्यान्न की लदान में 42.99 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि शामिल है.
वहीं क्लिंकर की लदान में भी 1.40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी. अलग-अलग वस्तुओं की ढुलाई में हुई यह वृद्धि रेलवे के माल परिवहन कारोबार के विस्तार की तस्वीर पेश करती है.
ग्राहक केंद्रित रणनीति पर रेलवे का जोर
पूर्वी रेलवे की इस उपलब्धि के पीछे वाणिज्यिक रणनीतियों और ग्राहक केंद्रित पहलों को महत्वपूर्ण माना गया है. पूर्वी रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक डॉ. उदय शंकर झा के मार्गदर्शन में इन पहलों को संचालित किया जा रहा है.
रेलवे के लिए माल ढुलाई केवल राजस्व बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है. कोयला, लौह अयस्क, खाद्यान्न और क्लिंकर जैसी वस्तुओं की बड़ी मात्रा में ढुलाई होने से उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े क्षेत्रों को रेल परिवहन की सुविधा मिलती है.
Eastern Railway Freight Loading: आगे भी माल ढुलाई बढ़ाने की चुनौती
पूर्वी रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि माल ढुलाई में वृद्धि के साथ आय भी बढ़ रही है. हालांकि इस प्रदर्शन को आगे भी कायम रखना रेलवे के लिए चुनौती होगी. इसके लिए माल ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार परिचालन व्यवस्था को बेहतर करना और माल परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना अहम होगा.
पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवराम माझी ने कहा कि यह वृद्धि ग्राहक संतुष्टि और परिचालन उत्कृष्टता पर रेलवे के निरंतर ध्यान को दर्शाती है. आने वाले महीनों में माल ढुलाई के प्रदर्शन पर नजर रहेगी, क्योंकि चालू वित्त वर्ष के अंतिम आंकड़े यह तय करेंगे कि शुरुआती बढ़त कितनी मजबूती से आगे कायम रहती है
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