नगर निगम बोर्ड की बैठक: 619.58 करोड़ का बजट पास, राजस्व और सुविधाओं से जुड़े सवालों का जवाब देने में अधिकारी असहजविकास के मुद्दे पर बजट की बैठक में नगर सरकार और उनकी कैबिनेट एवं निगम प्रशासन के बीच तीखी बहस देखने को मिली. कई मुद्दों पर पार्षदों ने निगम प्रशासन को घेरने का काम किया. पार्षदों के सवालों के सामने अधिकारी स्पष्ट जवाब देने में असहज नजर आये. जलापूर्ति, राजस्व व्यवस्था, बाॅयो-मेडिकल वेस्ट और बाजारों में हो रही कथित अवैध वसूली को लेकर सदन में तीखी बहस लंबे समय तक चली. पार्षदों ने शहर की समस्याओं और निगम की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ी नाराजगी जतायी. कई वार्ड पार्षदों ने निगम की आय के स्रोतों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा. विशेष रूप से शहर में पिछले तीन वर्षों से बंद पड़े होर्डिंग और विज्ञापन शुल्क से होने वाली आय, ट्रेड लाइसेंस से घटती कमाई और सूजागंज बाजार में फुटकर विक्रेताओं से वसूली की व्यवस्था पर सवाल उठाये गये. पार्षदों ने यह भी पूछा कि शहर में पार्किंग व्यवस्था से राजस्व क्यों नहीं बढ़ पा रहा है.साथ ही सैंडिस कंपाउंड में प्रवेश शुल्क और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से निगम को कितनी आमदनी हो रही है, इस पर भी स्पष्ट जानकारी देने की मांग की गयी. कई पार्षदों ने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए पारदर्शी और व्यवस्थित नीति बनाना जरूरी है. हालांकि, गहमागहमी के बीच बजट को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गयी. नगर आयुक्त की निगरानी में प्रस्तुत बजट में करीब 619.58 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया गया.
बुडको के कार्य और पेयजल व्यवस्था भी चर्चा में आया
बैठक में बुडको द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के दौरान क्षतिग्रस्त की गयी सड़कों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. पार्षदों ने कहा कि कई इलाकों में सड़कें मरम्मत के इंतजार में हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है. इसके अलावा बंद पड़ी जलमीनारों और नीली पाइपलाइन के कई हिस्सों में नल नहीं लगे होने से पानी की बर्बादी का विषय भी उठाया गया.
सुविधाओं और निगम के स्थापना दिवस मनाने को लेकर रखी मांगें
बैठक के दौरान पार्षदों ने शहर में खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत, नये शव वाहनों की खरीद, बायो-मेडिकल वेस्ट के बेहतर निस्तारण की व्यवस्था और नगर निगम के स्थापना दिवस को बड़े स्तर पर मनाने का प्रस्ताव भी रखा. नगर आयुक्त ने इन सुझावों पर विचार करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया.
अधिकारियों ने बजट को बताया विकासोन्मुख
मेयर ने कहा-मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के विकास और नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य पारदर्शी प्रशासन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए शहर को टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है.
नगर आयुक्त ने कहा-नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट शहर के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के साथ नयी योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्रित है, ताकि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सके.वार्ड 30 के पार्षद ने पानी की आपूर्ति को लेकर निगम प्रशासन को घेरा
वार्ड संख्या 30 के पार्षद अभिषेक आनंद ने शहर में पानी की आपूर्ति को लेकर निगम प्रशासन को घेरा. उन्होंने कहा कि कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं है, इसके बावजूद लोगों से जल कर लिया जा रहा है. उन्होंने पूछा कि जब सेवा ही पर्याप्त नहीं है तो कर वसूली का आधार क्या है. इस मुद्दे पर अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका.विज्ञापन नीति में देरी से राजस्व नुकसान
वार्ड संख्या 20 के पार्षद सांडिल्य नंदिकेश ने निगम की विज्ञापन नीति को लेकर सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि तीन वर्षों से होर्डिंग और विज्ञापन से जुड़े नये टेंडर जारी नहीं किये गये हैं, जिसके कारण निगम को संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है. इस पर संबंधित शाखा के प्रभारी ने बताया कि नयी एजेंसी के चयन के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
पार्षद ने पूछा-आखिर किसके संरक्षण में हाे रही है अवैध वसूली
वार्ड संख्या 38 के पार्षद अश्विनी जोशी मोंटी ने सूजागंज बाजार और संडे मार्केट में फुटकर दुकानदारों से कथित अवैध वसूली का मामला उठाया. उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसके संरक्षण में यह वसूली हो रही है और इससे अतिक्रमण को बढ़ावा क्यों मिल रहा है. उन्होंने इस मामले की जांच कराने की मांग भी की.बायो-मेडिकल वेस्ट उठाव पर अनियमितता का आरोपवार्ड संख्या 27 के पार्षद निकेश कुमार ने बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि शहर के सैकड़ों प्रतिष्ठानों से कचरा उठाने के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, जबकि अधिकृत एजेंसी के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. उनका आरोप था कि कई जगहों से कचरा नगर निगम की गाड़ियां उठाती हैं, लेकिन शुल्क निजी एजेंसी को दिया जा रहा है.
