बीच गंगा में बंद हुई यात्रियों से भरी नाव, एसडीआरएफ ने समय रहते किया रेस्क्यू
Bhagalpur News : भागलपुर में मंगलवार को गंगा नदी के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रियों से भरी एक बड़ी नाव अचानक खराब होकर धारा में बहने लगी. नाव पर सवार लोगों में दहशत फैल गई, लेकिन एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया.
भागलपुर से ऋषव मिश्रा कृष्णा की रिपोर्ट
Bhagalpur News : महादेवपुर घाट से बरारी घाट की ओर जा रही एक बड़ी नाव मंगलवार को बीच गंगा में तकनीकी खराबी का शिकार हो गई. इंजन बंद होते ही नाव नदी की तेज धारा में बहते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज की दिशा में पहुंचने लगी. सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर बरारी घाट पहुंचाया. घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.
इंजन बंद होते ही मच गई अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महादेवपुर घाट से बरारी घाट के लिए रवाना हुई नाव में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे. यात्रा के दौरान अचानक नाव का इंजन बंद हो गया. इंजन ठप पड़ते ही नाव गंगा की धारा में बहने लगी, जिससे यात्रियों के बीच घबराहट फैल गई. कई यात्रियों ने तत्काल प्रशासन और एसडीआरएफ को सूचना दी.
एसडीआरएफ ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर नीलू के नेतृत्व में एसडीआरएफ भागलपुर की टीम घटनास्थल पर पहुंची. टीम ने सबसे पहले नाव की स्थिति का आकलन किया और फिर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया. प्राथमिकता के आधार पर नाव पर मौजूद बीमार महिला और बुजुर्ग यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया.
सभी यात्रियों को सुरक्षित पहुंचाया किनारे
एसडीआरएफ के जवानों ने चरणबद्ध तरीके से सभी यात्रियों को रेस्क्यू कर बरारी घाट पहुंचाया. इसके बाद खराब नाव को सुरक्षित निकालने के लिए दूसरी बड़ी नाव की व्यवस्था की गई. काफी मशक्कत के बाद खराब नाव को टोचन कर किनारे तक लाया गया.
रामजी मंडल चला रहे थे नाव
जानकारी के अनुसार नाव का संचालन रामजी मंडल कर रहे थे, जबकि इसके मालिक पवन मंडल बताए जाते हैं. नाव में सवार यात्रियों को कुछ समय तक नदी के बीच परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन राहत टीम की त्वरित कार्रवाई से सभी सुरक्षित रहे.
प्रशासन ने सख्ती के दिए संकेत
घटना के बाद प्रशासन ने नाव संचालन को लेकर सख्त संदेश दिया है. नई व्यवस्था के तहत यदि किसी नाव का इंजन बीच नदी में खराब होता है और यात्रियों को एसडीआरएफ की मदद से बचाना पड़ता है, तो संबंधित नाव मालिक को निर्धारित राशि का केवल आधा भुगतान किया जाएगा.
सुरक्षित संचालन पर रहेगा जोर
प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से नाव मालिकों को नियमित रखरखाव और तकनीकी जांच के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकेगा. अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.