न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए गंगा से शंभुगंज पहुंचेगा पानी, सालाना 80 एमसीएम जलापूर्ति को मिली एनओसी

भागलपुर के शंभुगंज में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है. बढ़ुआ जलाशय से 80 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध कराने के लिए जल संसाधन विभाग ने सशर्त अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है. इस प्रोजेक्ट के लिए गंगा से बढ़ुआ जलाशय तक पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.

भागलपुर, बांका. बांका के शंभुगंज प्रखंड के गढ़ी मोहनपुर के पास प्रस्तावित 1400 मेगावाट क्षमता वाले न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए पानी की व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. 700-700 मेगावाट के दो यूनिट वाले इस प्रोजेक्ट के लिए बढ़ुआ जलाशय से सालाना 80 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी उपलब्ध कराने को जल संसाधन विभाग ने सशर्त अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया है. इसके साथ ही बाढ़ अवधि में गंगा के अधिशेष पानी को बढ़ुआ जलाशय तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने और इसके लिए जमीन के उपयोग का अधिकार अर्जित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है.

चार की जगह 11 महीने गंगा से बढ़ुआ जलाशय में पहुंचेगा पानी

न्यूक्लियर पावर प्लांट की सालाना 80 एमसीएम पानी की जरूरत पूरी करने के लिए मौजूदा जल अंतरण व्यवस्था में बदलाव करना होगा. जल संसाधन विभाग के अनुसार फिलहाल गंगा नदी से बढ़ुआ जलाशय में चार महीने तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था है. इसे बढ़ाकर 11 महीने करने का प्रस्ताव है. इसके लिए केंद्रीय जल आयोग की सहमति और अनापत्ति लेना जरूरी होगा. केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी के बाद ही सालाना 80 एमसीएम पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी.

प्लांट से निकलने वाले पानी का भी होगा उपचार

प्लांट के संचालन के बाद निकलने वाले करीब 22 एमसीएम पानी को उपचार के बाद ही बढ़ुआ जलाशय में वापस प्रवाहित किया जाना प्रस्तावित है. एनपीसीआइएल को इस पानी का आवश्यक उपचार कर उसे रेडियेशन-रहित करना होगा. इसके बाद ही इसे फ्लोबैक के रूप में जलाशय में छोड़ा जा सकेगा. इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद की ओर से निर्धारित मानकों का पालन करना होगा.

पानी लेने के बदले देना होगा जलकर और शुल्क

जल संसाधन विभाग की ओर से जारी एनओसी में कई शर्तें भी रखी गयी हैं. गंगा से औद्योगिक जरूरत के लिए पानी लेने के बदले बिहार सरकार की ओर से समय-समय पर निर्धारित जलकर और शुल्क का भुगतान करना होगा. जलापूर्ति के लिए निर्माण या पानी के उपयोग के दौरान विभाग की किसी परिसंपत्ति को नुकसान पहुंचने पर संबंधित कार्यकारी विभाग को अपने खर्च पर उसकी भरपाई करनी होगी.

सुरक्षा और आकस्मिक दुर्घटना की जिम्मेदारी भी तय

एनओसी की शर्तों के अनुसार निर्माण और पानी के उपयोग के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करना होगा. किसी आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यकारी विभाग की होगी. शर्तों का उल्लंघन होने पर जल संसाधन विभाग की ओर से एनओसी रद्द भी की जा सकती है.

गंगा से बढ़ुआ जलाशय तक पाइपलाइन के लिए जमीन की प्रक्रिया शुरू

प्लांट तक पानी पहुंचाने की योजना अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तक पहुंच गयी है. बाढ़ अवधि में गंगा के अधिशेष पानी को बढ़ुआ जलाशय तक पहुंचाने के लिए बेलहर में पाइपलाइन बिछायी जायेगी. इसके लिए बांका जिला भू-अर्जन कार्यालय ने मौजा बेलहर में करीब 110.077 डिसमिल जमीन के उपयोगकर्ता अधिकार का अर्जन करने की प्रक्रिया के तहत अधिघोषणा जारी की है.

आठ रैयतों की जमीन होगी शामिल

अधिघोषणा के अनुसार पाइपलाइन परियोजना के लिए आठ रैयतों से संबंधित जमीन शामिल है. संबंधित भूमि का प्रकार दोफसला बताया गया है. यानी इस कृषि भूमि पर सामान्य तौर पर एक वर्ष में दो मुख्य फसलें उगायी जाती हैं. परियोजना के लिए करीब 110.077 डिसमिल भूखंड का उपयोग किया जाना है.

आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद जारी हुई अधिघोषणा

जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से हितबद्ध व्यक्तियों से आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया के बाद अधिघोषणा जारी की गयी है. यह कार्रवाई बिहार में भूमिगत पाइपलाइन संबंधी प्रावधानों के तहत की गयी है. अधिघोषणा जारी होने के साथ ही पाइपलाइन के लिए आवश्यक भूमि के उपयोग का अधिकार अर्जित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गयी है.

केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी पर टिकी जलापूर्ति की अगली कड़ी

जल संसाधन विभाग की सशर्त एनओसी मिलने के बावजूद प्लांट के लिए पानी की व्यवस्था को अंतिम रूप देने में केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी अहम होगी. चार महीने की मौजूदा जल अंतरण अवधि को बढ़ाकर 11 महीने करने की अनुमति मिलने के बाद ही गंगा से बढ़ुआ जलाशय के जरिए सालाना 80 एमसीएम पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पूरी तरह आगे बढ़ सकेगी.

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By पिंटू प्रणव

प्रभात खबर में कंटेंट राइटर, जिन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 5 साल से ज़्यादा का अनुभव है. न्यूज़ राइटिंग, कंटेंट क्रिएशन, कॉपी एडिटिंग, हेडलाइन राइटिंग और फ़ैक्ट-चेकिंग में अनुभवी. कृषि, वन और पर्यावरण, शिक्षा, राजनीति, टेलीकम्युनिकेशन, धर्म और आध्यात्मिक मामले, सामाजिक मुद्दे, NGO और संस्थान, सरकारी कामकाज और समसामयिक मामलों जैसे कई विषयों पर काम किया है. संपादकीय मानकों और न्यूज़रूम की कार्यक्षमता को बनाए रखते हुए सटीक, प्रभावशाली और पाठकों पर केंद्रित पत्रकारिता करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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