श्रावणी मेला से पहले अजगैबीनाथ मठ की जमीन को लेकर सख्ती, धार्मिक न्यास पर्षद ने DM को लिखा पत्र

Bhagalpur News: अजगैबीनाथ मठ की भूमि के बिना अनुमति उपयोग पर धार्मिक न्यास पर्षद ने डीएम को पत्र भेजकर सख्त निर्देश दिए हैं। जानें क्या है पूरा मामला और न्यास का रुख।

Bhagalpur News: सुलतानगंज (भागलपुर). विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 से पहले सुलतानगंज स्थित अजगैबीनाथ मठ की भूमि को लेकर नया विवाद सामने आया है. बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने मठ की जमीन के उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए भागलपुर के जिलाधिकारी को पत्र भेजा है. पर्षद ने स्पष्ट किया है कि पूर्व अनुमति के बिना मठ की भूमि का किसी भी प्रशासनिक या अन्य उद्देश्य से उपयोग नहीं किया जा सकता.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब श्रावणी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन पार्किंग, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं में जुटा है.

बिना अनुमति मठ की जमीन का उपयोग नहीं होगा

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि सार्वजनिक धार्मिक न्यास की भूमि का उपयोग बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-44 के तहत केवल पर्षद की पूर्व स्वीकृति से ही किया जा सकता है.

पर्षद ने प्रशासन से कहा है कि इस कानूनी प्रावधान का पालन सुनिश्चित किया जाए.

महंत ने लगाया दबाव बनाने का आरोप

पत्र में बताया गया है कि अजगैबीनाथ मठ के महंत प्रेमानंद गिरी ने पर्षद को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि श्रावणी मेला और अन्य अवसरों पर जिला प्रशासन की ओर से मठ की भूमि पर पार्किंग संचालन और सुरक्षा बलों के लिए अस्थायी टेंट लगाने के लिए एनओसी देने का दबाव बनाया जा रहा है.

महंत ने आवेदन के साथ मठ की भूमि का ब्यौरा भी उपलब्ध कराया है.

आर्थिक नुकसान और अतिक्रमण की आशंका

धार्मिक न्यास पर्षद ने अपने पत्र में कहा है कि यदि मठ की भूमि का इस तरह उपयोग किया जाता है तो धार्मिक संस्था को आर्थिक नुकसान हो सकता है. साथ ही भविष्य में जमीन पर अतिक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है.

इसी वजह से पर्षद ने मठ की संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है.

Bhagalpur News: डीएम से क्या कहा गया?

पर्षद ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि मठ की भूमि को पार्किंग, अस्थायी शिविर या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयोग में नहीं लाया जाए, जब तक कि इसके लिए धार्मिक न्यास पर्षद से पूर्व अनुमति प्राप्त न हो.

पत्र में यह भी कहा गया है कि मठ की किसी भी भूमि का उपयोग करने से पहले नियमानुसार स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा.

कई अधिकारियों को भेजी गई पत्र की प्रति

इस संबंध में जारी पत्र की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), अंचलाधिकारी (सीओ), नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी तथा महंत प्रेमानंद गिरी को भी भेजी गई है, ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

श्रावणी मेला शुरू होने से पहले इस पत्र के सामने आने के बाद अब प्रशासन और धार्मिक न्यास पर्षद के बीच समन्वय के साथ आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी.

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Author: Shubhanka Kumar

Published by: Pratyush Prashant

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