भागलपुर से रिपोर्ट
Bhagalpur News: भागलपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हुई है. अब जिले की हर पंचायत में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र खोले जाएंगे. इन केंद्रों का संचालन स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं करेंगी. इससे गांवों में शुद्ध डेयरी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और महिलाओं को स्थायी स्वरोजगार का नया अवसर मिलेगा.
हर पंचायत तक पहुंचेगा सुधा का नेटवर्क
भागलपुर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए यह नई योजना शुरू की गई है. योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे. इन केंद्रों का संचालन पूरी तरह जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं करेंगी.
इस पहल का उद्देश्य गांव-गांव तक सुधा के गुणवत्तापूर्ण दूध एवं दुग्ध उत्पादों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना है. साथ ही ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिलेगी आर्थिक सहायता
जीविका-सुधा बिक्री केंद्र की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत वित्तीय सहायता दी जाएगी.
कुल परियोजना लागत 75 हजार रुपये निर्धारित की गई है. इसमें 60 हजार रुपये सरकारी सहायता के रूप में दिए जाएंगे, जबकि 15 हजार रुपये लाभार्थी महिला को स्वयं निवेश करने होंगे.
इस राशि से डीप फ्रीजर, विजी कूलर, परिवहन व्यवस्था और अन्य जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे, ताकि बिक्री केंद्र का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके.
दुकान खोलने के लिए क्या होंगी शर्तें?
योजना के तहत आवेदन करने वाली महिलाओं को कुछ निर्धारित मानकों का पालन करना होगा.
दुकान पंचायत क्षेत्र में अपनी या किराये की होनी चाहिए. दुकान का क्षेत्रफल कम से कम 70 वर्ग फीट होना अनिवार्य है. दुकान में बिजली की सुविधा और सड़क संपर्क उपलब्ध होना भी जरूरी होगा.
Bhagalpur News: चयन प्रक्रिया पूरी तरह होगी पारदर्शी
इस योजना में इच्छुक जीविका दीदियां आवेदन करेंगी. आवेदन मिलने के बाद संबंधित संकुल स्तरीय संघ (CLF) तय मानकों के आधार पर पात्र महिला का चयन करेगा.
प्रशासन का कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी, ताकि योग्य महिलाओं को ही योजना का लाभ मिल सके.
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डेयरी व्यवसाय से बढ़ेगी महिलाओं की आमदनी
भागलपुर जिले की बड़ी संख्या में जीविका दीदियां पहले से ही पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी हुई हैं. वे सुधा डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से दूध की आपूर्ति भी करती हैं.
अब बिक्री केंद्र खुलने के बाद महिलाएं केवल दूध बेचने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि दही, घी, पनीर, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों की खुदरा बिक्री भी कर सकेंगी. इससे उनकी आय के नए स्रोत विकसित होंगे.
गांवों में मिलेगा रोजगार, उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. गांव के लोगों को अपने ही पंचायत क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे. साथ ही महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू हुई तो भागलपुर मॉडल भविष्य में बिहार के अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकता है.
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