Mayaganj Hospital Bhagalpur: भागलपुर प्रमंडल के स्वास्थ्य इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हुआ. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) यानी मायागंज अस्पताल के नेत्र विभाग में पहली बार सफलतापूर्वक कॉर्निया प्रत्यारोपण (पेनिट्रेटिंग केराटोप्लास्टी) किया गया. इस एक सफल ऑपरेशन ने भागलपुर समेत आसपास के दर्जनों जिलों के कॉर्निया रोग से पीड़ित मरीजों की धुंधली आंखों में उम्मीद की नई चमक भर दी है.
महानगरों का चक्कर और इलाज का भारी-भरकम खर्च: जानिए क्यों ऐतिहासिक है यह उपलब्धि
भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, कटिहार और सीमांचल के ग्रामीण इलाकों से हर दिन सैकड़ों मरीज आंखों की गंभीर समस्याओं को लेकर मायागंज अस्पताल पहुंचते हैं. इनमें से कई ऐसे बदनसीब मरीज होते हैं जिनका कॉर्निया किसी चोट, संक्रमण या बीमारी के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका होता है. अब तक जब भी मायागंज अस्पताल में ऐसे मरीज आते थे, तो डॉक्टरों को लाचारी में उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था. गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए दूसरे राज्यों में जाकर कॉर्निया ट्रांसप्लांट कराना आर्थिक रूप से मुमकिन नहीं हो पाता था. कई बार पैसों के अभाव में लोग अपनी दृष्टि हमेशा के लिए खो बैठते थे. इसी दर्द और मजबूरी को दूर करने के लिए जेएलएनएमसीएच के नेत्र विभाग ने स्थानीय स्तर पर कॉर्निया प्रत्यारोपण जैसी अति-आधुनिक और जटिल सर्जरी शुरू करने का साहसिक कदम उठाया.
चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और ओटी स्टाफ का अद्भुत तालमेल
शनिवार को जब मरीज को ऑपरेशन थिएटर में लाया गया, तो डॉक्टरों की पूरी टीम के कंधों पर एक नई शुरुआत की बड़ी जिम्मेदारी थी. इस अति-संवेदनशील और जटिल सर्जरी की कमान अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद कुमार मंडल के हाथों में थी. सर्जरी के दौरान डॉ. पम्मी राय ने सर्जिकल सहयोग देते हुए पूरी तत्परता दिखाई. वहीं विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जगदीश प्रसाद और डॉ. अर्चना कुमारी का मार्गदर्शन पूरी प्रक्रिया के दौरान टीम का हौसला बढ़ाता रहा. केवल सर्जन ही नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक सर्जरी को अंजाम देने में नेत्र विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों, स्नातकोत्तर (पीजी) विद्यार्थियों, आई बैंक की समर्पित टीम और ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों ने भी अपनी जान फूंक दी. करीब घंटों चली इस सूक्ष्म शल्य चिकित्सा के बाद जब प्रत्यारोपण सफल रहा, तो ओटी से बाहर आते ही डॉक्टरों के चेहरे पर सुकून और कामयाबी की मुस्कान बिखर गई.
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और आई बैंक के तालमेल से संभव हुआ मेडिकल चमत्कार
अस्पताल परिसर में इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय केवल चिकित्सा टीम के हुनर को ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति को भी जाता है. नेत्र विभाग की ओर से अस्पताल के अधीक्षक और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया. अधिकारियों के सतत मार्गदर्शन, प्रशासनिक समर्थन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की वजह से ही सरकारी अस्पताल में पेनिट्रेटिंग केराटोप्लास्टी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधा का सपना धरातल पर उतर सका. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मायागंज अस्पताल में आई बैंक की सक्रियता और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता ने इस जटिल सर्जरी को आसान बनाया है. यह सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर सरकारी अस्पतालों को सही दिशा और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो वे भी कॉर्पोरेट अस्पतालों जैसे चमत्कार कर सकते हैं.
गरीब मरीजों को मिलेगी राहत, अब नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्य
जेएलएनएमसीएच में कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से भागलपुर और आसपास के इलाकों में रहने वाले आम लोगों के जीवन पर इसका सीधा और दूरगामी असर पड़ेगा. जो गरीब मरीज पैसों की तंगी की वजह से अपनी आंखों की रोशनी गंवाने की कगार पर खड़े थे, उनके लिए यह केंद्र किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा. अब भागलपुर के साथ-साथ कोसी, पूर्वोत्तर बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले कॉर्निया रोगियों को प्रत्यारोपण के लिए बाहर जाने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाएगी. स्थानीय स्तर पर यह सुविधा मिलने से मरीजों का न सिर्फ लाखों रुपया बचेगा, बल्कि यात्रा के दौरान होने वाली शारीरिक और मानसिक परेशानी से भी राहत मिलेगी.
Mayaganj Hospital Bhagalpur: स्वास्थ्य सेवाओं में नया सवेरा और आगे की संभावनाएं
सफलतापूर्वक संपन्न हुई इस पहली कॉर्निया सर्जरी के बाद अब जेएलएनएमसीएच प्रबंधन आगे की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने में जुट गया है. नेत्र विभाग की योजना है कि आने वाले दिनों में कॉर्निया प्रत्यारोपण की इस प्रक्रिया को नियमित रूप से संचालित किया जाए, ताकि प्रतीक्षारत मरीजों को बिना किसी विलंब के नया जीवन और नई रोशनी मिल सके. इसके लिए आई बैंक के जरिए नेत्रदान अभियान को भी गति देने की तैयारी की जा रही है. डॉक्टरों का मानना है कि जैसे-जैसे समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, वैसे-वैसे कॉर्निया की उपलब्धता आसान होगी और अधिक से अधिक दृष्टिहीन लोगों की जिंदगी में उजियारा लाया जा सकेगा. मायागंज अस्पताल की यह उपलब्धि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता के टूटते विश्वास को फिर से बहाल करने की दिशा में एक मजबूत कदम है.
