मानसून की बेरुखी से भागलपुर बेहाल : सूखे खेत, बढ़ी किसानों की चिंता, धान की खेती पर संकट

Bhagalpur Drought : मानसून की बेरुखी से भागलपुर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. खेत सूख रहे हैं, किसान चिंतित हैं और धान की खेती पर संकट गहराता जा रहा है. कृषि संकट बढ़ा.

भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur Drought : मानसून की बेरुखी इस बार भागलपुर के किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. जुलाई का पहला सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक बारिश न के बराबर हुई है. तेज धूप और उमस ने आम लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है. खेत सूखे पड़े हैं और धान की रोपाई का समय तेजी से निकलता जा रहा है.

Bhagalpur Drought : बारिश न होने से बिगड़े हालात

जिले में मानसून की धीमी चाल ने हालात गंभीर बना दिए हैं. आसमान में बादल जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बारिश का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहा है. रविवार सुबह से ही तेज धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां खेतों में नमी तक नहीं बची है.

किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है.

10 मिमी से भी कम बारिश

इस वर्ष जून महीने में भागलपुर जिले में बारिश का स्तर बेहद कम रहा है. पूरे महीने में 10 मिलीमीटर से भी कम वर्षा दर्ज की गई. सामान्य तौर पर इस समय तक खेतों में पानी भर जाना चाहिए था, लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है.

किसान अब जुलाई की शुरुआत में मानसून के सक्रिय होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन 5 जुलाई तक भी बारिश नहीं हो सकी है.

अनुमान भी नहीं दिखा रहा असर

11 जून को बिहार में मानसून के प्रवेश के बाद मौसम विभाग की ओर से कई बार बारिश की संभावना जताई गई थी. हालांकि अधिकतर पूर्वानुमान फेल साबित हुए हैं. इससे किसानों में निराशा बढ़ती जा रही है.

बारिश नहीं होने के कारण धान की खेती की पूरी प्रक्रिया बाधित हो रही है और खेतों की तैयारी अधर में लटक गई है.

90 प्रतिशत खेतों में बिचड़ा नहीं

मानसून की बेरुखी का सबसे बड़ा असर धान की खेती पर पड़ाहै. जिले के लगभग 90 प्रतिशत खेतों में अब तक बिचड़ा नहीं गिर पाया है. जिन किसानों ने किसी तरह बीज डाल भी दिया है, वे सिंचाई के सहारे उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान की रोपाई प्रभावित होगी बल्कि खरीफ फसलों का कुल उत्पादन भी बड़े स्तर पर गिर सकता है.

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Published by: Brajesh nandan mad

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