बार-बार भूलने की बीमारी को उम्र का तकाजा समझकर न करें नजरअंदाज: भागलपुर के डॉक्टर ने बताई अल्जाइमर की चौंकाने वाली सच

क्या आपके घर के बुजुर्ग चीजों को रखकर भूल जाते हैं या हाल की बातें याद नहीं रख पाते? इसे सिर्फ उम्र का असर समझना बड़ी भूल हो सकती है. भागलपुर के डॉक्टरों ने विश्व अल्जाइमर दिवस पर इस गंभीर बीमारी के शुरुआती लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में बताया है.

World Alzheimers Day Bhagalpur: उम्र ढलने के साथ अक्सर जब हमारे घर के बुजुर्ग कोई सामान रखकर भूल जाते हैं या हाल ही में हुई किसी बातचीत को याद नहीं रख पाते, तो हम इसे उम्र का असर कहकर मुस्कुरा कर टाल देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मासूम सी दिखने वाली भूलक्कड़ आदत किसी गंभीर दिमागी बीमारी की आहट भी हो सकती है. जी हां, जिस भूलने की समस्या को हम और आप अक्सर बेहद सामान्य मान लेते हैं, वह अल्जाइमर जैसी खौफनाक और धीरे-धीरे दिमाग को सुन्न कर देने वाली बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है. भागलपुर में विश्व अल्जाइमर दिवस के खास मौके पर डॉक्टरों ने इस बीमारी की कड़वी हकीकत उजागर करते हुए लोगों को समय रहते सतर्क होने की चेतावनी दी है.

मनस्वी हॉस्पिटल में सजी चौपाल, मरीजों और परिजनों को मिली बड़ी सीख

विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर शनिवार को भागलपुर स्थित मनस्वी हॉस्पिटल में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को अल्जाइमर बीमारी के लक्षण, इसकी समय पर पहचान, सही उपचार और मरीजों की सही देखभाल से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं. अस्पताल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद समाज में डिमेंशिया और अल्जाइमर को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना था. डॉक्टरों की टीम ने लोगों को समझाया कि सही समय पर लिया गया एक डॉक्टरी परामर्श किसी मरीज की ढलती जिंदगी में सुकून भर सकता है.

अल्ज़ाइमर केवल भूलना नहीं, यह दिमाग को सुन्न करने वाली बीमारी है: डॉ. पंकज

कार्यक्रम में मौजूद प्रसिद्ध न्यूरो-साइकोट्रिस्ट डॉ. पंकज कुमार मनस्वी ने अल्जाइमर के चिकित्सीय पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि अल्जाइमर केवल कोई सामान्य भूलने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की एक लगातार बढ़ने वाली जटिल बीमारी है. इस बीमारी की चपेट में आने के बाद इंसान की याददाश्त धीरे-धीरे मिटने लगती है. इसके साथ ही व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, सही निर्णय लेने की योग्यता और रोजमर्रा के सामान्य कामकाज करने की शक्ति पर भी गहरा असर पड़ता है. डॉ. पंकज ने बताया कि अगर आपके घर का कोई बुजुर्ग बार-बार एक ही बात पूछ रहा है, हाल ही की घटनाओं को तुरंत भूल जाता है, जाने-पहचाने रास्तों पर भी भटकने लगता है या उसके व्यवहार में अचानक गुस्सा और चिड़चिड़ापन आने लगे, तो इसे उम्र का प्रभाव मानकर नजरअंदाज न करें. समय पर जांच और उचित इलाज से मरीज की देखभाल बेहतर तरीके से की जा सकती है.

अपनों के प्यार और धैर्य से ही जीतेगी जिंदगी, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट का संदेश

अल्ज़ाइमर बीमारी का केवल चिकित्सीय ही नहीं, बल्कि एक बेहद भावुक और मानवीय पहलू भी होता है. इसी मानवीय पक्ष को छूते हुए क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आशुतोष रंजन ने परिजनों की भूमिका को सबसे अहम बताया. उन्होंने कहा कि जब कोई इंसान अल्जाइमर से पीड़ित होता है, तो उसका अपने दिमाग और यादों पर नियंत्रण नहीं रहता. ऐसे में परिवार के सदस्यों को उनके साथ अत्यंत धैर्य, सम्मान और सहानुभूति भरा व्यवहार करना चाहिए. मरीजों के लिए एक नियमित दैनिक दिनचर्या बनाना, उन्हें हल्की-फुल्की मानसिक व सामाजिक गतिविधियों में शामिल रखना और उनके आसपास एक सुरक्षित वातावरण देना बहुत जरूरी होता है. परिजनों का थोड़ा सा प्यार और देखभाल मरीज को अवसाद और अकेलेपन से बचा सकता है.

World Alzheimers Day Bhagalpur: भागलपुर और आसपास के इलाकों में बढ़ती समस्या और आगे की राह

भागलपुर और इसके आसपास के इलाकों में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के साथ ही अल्जाइमर और डिमेंशिया के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. जागरूकता की कमी के कारण अक्सर लोग शुरुआती स्टेज में डॉक्टर के पास नहीं जाते, जिससे बीमारी काफी आगे बढ़ जाती है. मनस्वी हॉस्पिटल की पूरी टीम ने आम जनता से भावुक अपील की है कि अगर आपके आसपास या घर में किसी व्यक्ति में लगातार भूलने की समस्या बढ़ रही है, तो बिना देर किए विशेषज्ञ से परामर्श लें. समय पर की गई जांच और सही डॉक्टरी देखभाल से न सिर्फ बीमारी की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है, बल्कि मरीज को एक सम्मानजनक और सुखद जीवन भी दिया जा सकता है.

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By Atul kumar

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