Bhagalpur News: भागलपुर शहर में सार्वजनिक सुविधाओं के नाम पर सरकारी खजाने से लगातार पैसा खर्च हो रहा है, लेकिन सवाल यह है कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल आम लोग कितने दिन कर पाते हैं? भागलपुर में नगर निगम और स्मार्ट सिटी की योजनाओं के तहत पिछले वर्षों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक शौचालय और यूरिनल बनाये गये. कहीं पानी की व्यवस्था नहीं हुई, कहीं रखरखाव के अभाव में टॉयलेट टूट गये और कहीं दरवाजे तक गायब हो गये.
अब पुराने शौचालयों की बदहाली दूर करने के बजाय नगर निगम शहर में 74 नये स्थानों पर शौचालय और यूरिनल बनवा रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुराने निर्माणों की स्थिति सुधारने के बजाय बार-बार नये निर्माण पर सरकारी पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है? और सबसे अहम सवाल यह है कि नये शौचालय बनने के बाद उनका रखरखाव कैसे होगा?
लाखों खर्च कर बने शौचालय, अब इस्तेमाल के लायक नहीं
पिछले करीब दस वर्षों में नगर निगम की ओर से शहर के अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय और यूरिनल बनाये गये. स्टेशन चौक, लोहिया पुल के पास, बड़ी पोस्ट ऑफिस के समीप और कचहरी चौक जाने वाले रास्ते सहित कई जगहों पर टाइल्स लगे शौचालय बनाये गये.
एक शौचालय या यूरिनल के निर्माण पर करीब पांच लाख रुपये तक खर्च किये गये. लेकिन निर्माण के बाद इनके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था सवालों के घेरे में रही.
कई जगह पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से शौचालय धीरे-धीरे गंदगी का केंद्र बन गये. स्टेशन चौक के आगे बना यूरिनल इतना खराब हो गया कि उसे हटाना पड़ा. बड़ी पोस्ट ऑफिस के पास बने शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब बतायी जा रही है.
यानी जिस सुविधा के लिए जनता का पैसा खर्च किया गया, वही सुविधा कुछ समय बाद जनता के इस्तेमाल से बाहर होती चली गयी.
स्मार्ट सिटी के ई-टॉयलेट का भी यही हाल
भागलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना के दौरान शहर में आधुनिक ई-टॉयलेट भी लगाये गये थे. इन टॉयलेट को पारंपरिक निर्माण से अलग आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक शौचालय के तौर पर तैयार किया गया था.
लेकिन रखरखाव की कमी ने कुछ ही समय में इनकी तस्वीर बदल दी. कई जगह ई-टॉयलेट के दरवाजे गायब हो गये. कुछ स्थानों पर मशीन और दूसरे हिस्से खराब होने लगे. धीरे-धीरे कई ई-टॉयलेट का अस्तित्व ही खत्म हो गया.
इसके बाद निगम की ओर से कुछ जगहों पर दोबारा तैयार शौचालय लगाये गये. ये रेडीमेड शौचालय थे. लेकिन इनके साथ भी रखरखाव की समस्या दूर नहीं हुई. स्थिति यह है कि कुछ स्थानों पर इनके दरवाजे तक नहीं बचे हैं.
तीन करोड़ के 25 इलेक्ट्रॉनिक टॉयलेट पर भी सवाल
स्मार्ट सिटी लिमिटेड, भागलपुर की ओर से करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से 25 इलेक्ट्रॉनिक टॉयलेट बनाये गये. करीब एक साल पहले तैयार हुए इन टॉयलेट को देखकर शुरुआत में शहर में आधुनिक सार्वजनिक सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी.
दूर से देखने पर ये टॉयलेट आकर्षक नजर आते हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव में कई जगह इनकी स्थिति खराब होने लगी है. टॉयलेट के कई सामान टूटने या गायब होने की स्थिति में हैं. कई जगह इनका नियमित संचालन भी सवालों के घेरे में है.
यह स्थिति बताती है कि सार्वजनिक निर्माण में केवल भवन या ढांचा तैयार करना पर्याप्त नहीं है. उसके बाद पानी, सफाई, बिजली, सुरक्षा और नियमित रखरखाव की व्यवस्था नहीं होगी तो महंगी सुविधा भी कुछ समय बाद बेकार हो सकती है.
अब 74 जगहों पर फिर शुरू हुआ नया निर्माण
पुराने शौचालयों की बदहाली के बीच नगर निगम ने अब शहर में एक बार फिर बड़े स्तर पर सार्वजनिक शौचालय और यूरिनल बनाने का काम शुरू किया है.
निगम की योजना के अनुसार 74 स्थानों पर शौचालय और यूरिनल का निर्माण कराया जा रहा है. इन स्थानों पर कुल 298 सीटें लगायी जानी हैं.
एक सीट की कीमत करीब 32 हजार रुपये बतायी गयी है. इस हिसाब से केवल सीटों पर ही बड़ी राशि खर्च होगी. इसके अलावा निर्माण, पानी, पाइपलाइन, बिजली, सफाई और दूसरे जरूरी कामों पर भी खर्च होना है.
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. जब पहले से बने शौचालयों में से बड़ी संख्या रखरखाव के अभाव में खराब हो गयी, तो नये शौचालयों को लंबे समय तक उपयोगी रखने के लिए क्या व्यवस्था की गयी है?
निर्माण से ज्यादा जरूरी होगा रखरखाव
सार्वजनिक शौचालय किसी भी शहर की बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं. खासकर बाजार, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, बस स्टैंड और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर इनकी जरूरत सबसे ज्यादा होती है.
भागलपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में रोजाना हजारों लोग बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचते हैं. ऐसे में पर्याप्त और साफ शौचालय होना जरूरी है. लेकिन शौचालय बनाकर छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है.
अगर पानी नहीं होगा, सफाई नहीं होगी, टूटे सामान की मरम्मत नहीं होगी और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होगी तो नया शौचालय भी कुछ वर्षों में पुराने शौचालय जैसा ही दिखाई दे सकता है.
Bhagalpur News: जनता के पैसे की जवाबदेही का सवाल
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी खर्च की जवाबदेही का है. पहले बनाये गये शौचालयों पर कितना पैसा खर्च हुआ, उनमें से कितने अभी उपयोग में हैं, कितनों की मरम्मत संभव है और कितने पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं. इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है.
साथ ही नये 74 स्थानों पर बनने वाले शौचालयों के लिए पानी, सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
शहर को नये शौचालय जरूर चाहिए, लेकिन पुराने शौचालयों की कहानी से सबक लेना उससे भी ज्यादा जरूरी है. वरना आज बन रहे ये नये टॉयलेट भी कुछ साल बाद टूटे दरवाजों, गंदगी और खराब सुविधाओं के बीच खड़े नजर आ सकते हैं.
Also Read: नेपाल में बाढ़ से बिहार में दहशत, अमित शाह ने किया सम्राट चौधरी को फोन, मांगी पूरी जानकारी
