Bhagalpur News. जगतपुर में कम, डिमहा जलाशय में स्थानीय पक्षी अधिक और कमला कुंड में दिखे शिवहंस
जिले के चार जलाशयों में पक्षियों की गणना संपन्न.
जिले के चार जलाशयों में एशियन जल पक्षी गणना संपन्नजिले के जगतपुर झील, गंगा प्रसाद झील, डीमहा और कमला कुंड जलाशयों में एशियन जल पक्षी गणना संपन्न हो गयी. इनमें तीन जलाशयों में पिछले वर्ष भी गणना हुई थी, जबकि कमलाकुंड में पहली बार गणना की गयी. इस वर्ष जगतपुर झील में प्रवासी पक्षियों की विविधता कायम रही, पर उनकी संख्या में काफी गिरावट देखी गयी. डीमहा जलाशय में प्रवासी पक्षियों की संख्या कम थी, जबकि स्थानीय प्रजातियों की संख्या अधिक देखी गयी.
सर्वेक्षण दल में ये रहे शामिल
एडब्ल्यूएस-2026 के को-ऑर्डिनेटर सह जंतु विज्ञान विभाग के प्रो डीएन चौधरी के नेतृत्व में सर्वेक्षण किया गया. सर्वेक्षण दल में राहुल रोहिताश्व, आनंद, ज्ञान चंद ज्ञानी, मुकेश, गौरव और शोध छात्र जय कुमार जय शामिल थे.
किस झील में क्या पाया
डॉ चौधरी के अनुसार, प्रवासी पक्षियों में विशेष रूप से लार्ज क्रेस्टेड ग्रीव यानि शिवहंस, गडवाल, कूट या तिलकधारी और यूरेशियन करल्यू ने डीमहा का मान बढ़ाया. वहीं जगतपुर झील में प्रवासी बतखों में लालसर, गडवाल, कौमन पोचार्ड, वीजन, ह्वाइट आई पोचार्ड, टफ्टेड डक, काॅमन टील, नोरदर्न पिनटेल डंक, सोभलर और अलासकन शिकारी पक्षी ओस्प्रे ने जगतपुर झील की विविधता को कायम रखने में सहायक रहे. जगतपुर झील में सफाई, जलकुंभियों से निजात दिलाने पर प्रशासन और वन विभाग को विचार करने की जरूरत है. कमलाकुंड में शिवहंस के जोड़े देखे गये.
वाहनों के ध्वनि प्रदूषण से गंगा प्रसाद झील में कम थी चहचहाहट
गंगा प्रसाद झील में पर्याप्त जल है, उसके बावजूद पक्षियों की संख्या में भारी गिरावट देखी गयी. इस झील में पनकौआ, घोंघिल, छोटी सिल्ही व कूट पक्षियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी. इस झील के बगल में खेती और एक तरफ सड़क ने इसकी विविधता को नुकसान पहुंचाया है. नवगछिया-गोपालपुर सड़क पर अनायास बढ़ते आवागमन और भारी वाहनों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण ने पक्षियों को काफी प्रभावित किया है. कभी यह झील पक्षियों से गुलजार हुआ करता था.
सबसे अधिक ये पक्षियां दिखीं
इस पूरे सर्वेक्षण में इस बार सबसे अधिक ह्वाइट आइबीज, पनकौए, कूट और घोघिल पक्षी देखे गये. ये पक्षी सभी जलाशयों में अधिक संख्या में दिखायी दिये.