नवगछिया में कटाव निरोधी कार्यों से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हजारों लोगों को गांव में मिला रोजगार

Employment in the village : नवादा जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा चलाए जा रहे कटाव निरोधी कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई राह दिखा रहे हैं. इन परियोजनाओं से न केवल बाढ़ सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि स्थानीय मजदूरों, युवाओं और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं.

Employment in the village : नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर, रंगरा, खरीक समेत कई प्रखंडों में जल संसाधन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की लागत से कटाव निरोधी कार्य कराए जा रहे हैं. ये परियोजनाएं अब केवल बाढ़ सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं. निर्माण कार्यों के कारण स्थानीय मजदूरों, शिक्षित युवाओं और छोटे कारोबारियों को करीब छह माह तक गांव में ही रोजगार मिल रहा है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं.

मजदूरों से लेकर शिक्षित युवाओं तक को मिला काम

कटाव निरोधी योजनाओं में बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूर कार्यरत हैं. वहीं शिक्षित युवाओं को मुंशी, सुपरवाइजर और अन्य प्रबंधन कार्यों में रोजगार मिला है. इसके अलावा पेटी ठेकेदार, मेठ (मजदूर सप्लायर), ट्रैक्टर एवं हाइवा संचालक तथा बालू ढुलाई से जुड़े लोगों को भी लगातार काम मिलने से उनकी आमदनी बढ़ी है.

स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारियों को भी फायदा

निर्माण स्थलों के आसपास चाय-नाश्ता, भोजन, किराना और बोतलबंद पेयजल की दुकानों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. भारी संख्या में ट्रैक्टर, हाइवा, जेसीबी और अन्य मशीनों के संचालन से डीजल-पेट्रोल की खपत भी बढ़ी है. श्रमिकों के भोजन की व्यवस्था के कारण स्थानीय रसोइयों को भी रोजगार के अवसर मिले हैं.

पलायन में आई कमी, गांव में ही मिल रहा रोजगार

ग्रामीणों का कहना है कि पहले रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोगों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब कटाव निरोधी परियोजनाओं के चलते गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है. इससे स्थानीय बाजारों में नकदी का प्रवाह बढ़ा है और छोटे व्यवसायियों की आय में भी इजाफा हुआ है.

मेठ से ठेकेदार बने कई स्थानीय युवा

स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन जारी रहना चाहिए तथा स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. पिछले एक दशक से अधिक समय से इस्माईलपुर–बिंद टोली तटबंध पर चल रहे कटाव निरोधी कार्यों की बदौलत तिनटंगा करारी, बाबू टोला कमलाकुंड और बुद्धूचक के दर्जनों युवा पहले मेठ के रूप में काम करते थे, लेकिन आज वे स्वयं ठेकेदार बनकर अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं.

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