bhagalpur news. भूमि के जाली दस्तावेज संबंधी मामले को दबाने पर सीओ पर होगी कड़ी कार्रवाई
भूमि से संबंधित जाली दस्तावेज प्रस्तुत करनेवाले लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है.
भूमि से संबंधित जाली दस्तावेज प्रस्तुत करनेवाले लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है. प्राथमिकी स्थानीय थाने में दर्ज होगी. ऐसा नहीं करनेवाले और मामले को दबा कर रखनेवाले सीओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. इस बाबत राजस्व व भूमि सुधार विभाग के सचिव ने सभी अंचल अधिकारियों को पत्र भेजा है. भूमि सुधार जन कल्याण संवाद में नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन, सार्वजनिक भूमि से संबंधित वादों व अन्य राजस्व कार्यवाहियों में जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले मिले हैं, जबकि सीओ ने प्राथमिकी नहीं करायी. गंभीर आपराधिक मामले में जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं करने का निर्देश दिया गया है. ऐसे मामले में पूर्व में कोई आदेश पारित किये गये होंगे, तो उसकी विधिसम्मत समीक्षा कर कार्रवाई की जायेगी. विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज न कराना या मामले को दबाने का प्रयास घोर लापरवाही व कदाचार माना जायेगा और इसमें अंचल अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे. इन धाराओं के तहत होगी प्राथमिकी –धारा-336 (3) और धारा-336 (4) : फॉर्जरी –धारा-339 : दस्तावेजों को जाली जानते हुए उपयोग में लाने के लिए कब्जे में रखना –धारा-340(2) : जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को असली के रूप में उपयोग में लाना. –धारा-318(4) : चीटिंग –धारा-324 (5) : मिसचीफ –धारा-61(2) (ए) : आपराधिक षडयंत्र
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