Bihar News: बिहार में पुल निर्माण के 56 करोड़ रुपए का नहीं मिला हिसाब, ACS ने 23 जिलों के DM को लिखा पत्र

Bihar News: बिहार के 23 जिलों ने वर्ष 2006-07 से 2019-20 तक पुल निर्माण योजना के 56.63 करोड़ रुपए का हिसाब नहीं दिया है. जिसको लेकर विभाग के एसीएस ने 23 जिलों के डीएम को पत्र लिखा है.

Bihar News: बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने बिहार के 23 जिलों से मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना की 56 करोड़ 63 लाख 90 हजार 792 रुपए की राशि का हिसाब मांगा है. संबंधित जिलों ने इस राशि की स्थिति का हिसाब नहीं दिया है. इस संबंध में पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह ने 23 जिलों के डीएम को पत्र लिखा है.

13 साल का मांगा हिसाब

डीएम को निर्देश दिया गया है कि मुख्यमंत्री पुल निर्माण योजना के तहत सभी संबंधित जिलों को प्राप्त राशि में से अब तक उपयोग नहीं की गई राशि को विभाग को तत्काल वापस कर दिया जाए. उपयोग की गई राशि का डीसी बिल (बची हुई राशि का बिल) एक सप्ताह के अंदर जमा करने का निर्देश दिया गया है. वर्ष 2006-07 से 2019-20 तक की बची हुई राशि का हिसाब मांगा गया है.

बाढ़ में कई पुल हुए थे ध्वस्त-क्षतिग्रस्त

मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के क्रियान्वयन के लिए भागलपुर जिले के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में सात अक्टूबर को जिला संचालन समिति की बैठक हुई. इसमें 500 से 250 की आबादी वाली बस्तियों को मुख्य सड़क से जोड़ने, पूर्व से बने जर्जर पुल की जगह नया पुल बनाने, पूर्व से बने पथ में छूटे पुल-पुलियों का निर्माण करने, बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल की जगह नया पुल बनाने, निर्मित पुलों तक पहुंच पथ बनाने आदि का प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया. योजना में भागलपुर अनुमंडल में 46, कहलगांव अनुमंडल में 29 और नवगछिया अनुमंडल में 45 पुल-पुलियों का निर्माण शामिल है. उधर, विभाग अब पुरानी योजना का हिसाब-किताब निपटाने में जुट गया है.

किस जिले में कितने का बिल पेंडिंग

जिला पेंडिंग बिल (लाखों में)
पश्चिम चंपारण 872.0 लाख
मधुबनी617.37 लाख
वैशाली571.672 लाख
भभुआ510.56 लाख
सीतामढ़ी401.26 लाख
अररिया376.838 लाख
गया328.78079 लाख
भागलपुर315.00 लाख
मुजफ्फरपुर272.63 लाख
औरंगाबाद 244.15 लाख
नवादा242.00 लाख
मुंगेर225.0002 लाख
बक्सर190.15 लाख
बांका76.21 लाख
सुपौल48.557 लाख
किशनगंज48.53 लाख
गोपालगंज32.47 लाख
जमुई25.73 लाख
कटिहार12.30 लाख
मधेपुरा 1.2629 लाख
लखीसराय0.284 लाख
सहरसा0.002 लाख
पूर्वी चंपारण0.00003 लाख

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By Anand Shekhar

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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