घर से बाढ़ ने भगाया, अस्पताल रखने को तैयार नहीं, अब उर्मिला ढूंढ़ रही लकवाग्रस्त पति को लिटाने की जगह

अंजनी सबौर : मुसीबत कभी बोल कर नहीं आती है और आती है, तो चारों ओर से घेर लेती है. फिर उससे निकलने का कोई रास्ता भी नहीं सूझता. आज बुजुर्ग गजाधर और उर्मिला ऐसी ही विपदा झेलने को मजबूर हैं. सरधो पंचायत के छोटी इब्राहिमपुर में लकवा ग्रस्त गजाधर मंडल (85) और उनकी पत्नी […]

अंजनी

सबौर : मुसीबत कभी बोल कर नहीं आती है और आती है, तो चारों ओर से घेर लेती है. फिर उससे निकलने का कोई रास्ता भी नहीं सूझता. आज बुजुर्ग गजाधर और उर्मिला ऐसी ही विपदा झेलने को मजबूर हैं.

सरधो पंचायत के छोटी इब्राहिमपुर में लकवा ग्रस्त गजाधर मंडल (85) और उनकी पत्नी उर्मिला देवी बाढ़ के पानी के बीच लगभग 15 दिनों तक घर में कैद रहे. घर में रखा सारा सामान पानी की भेंट चढ़ गया. किसी तरह मुसीबत में उन्होंने 15 दिन बिताये. इस दौरान गजाधर की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी. एक तरफ भोजन नहीं मिल रहा था और दूसरी तरफ बाढ़ और बीमारी पीछा छोड़ने को तैयार नहीं.

आखिरकार उर्मिला गजाधर को ठेले पर लेकर मायागंज अस्पताल पहुंची. सोचा यहां भर्ती हो गये, तो कम से कम जान बच जायेगी. लेकिन डॉक्टर ने कुछ दवा देकर विदा कर दिया. परिस्थिति यह है कि बीमार पति को लेकर कहां रहें. पैर में सूजन के अलावा बहुत तकलीफ बढ़ गयी है.

मदद की कोई आस नहीं

आसपास सहित प्रशासन के लोगों में से भी मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आया. पहले से ही गरीबी का दंश झेल रहे गजाधर को खाने पर भी आफत है. ऐसे में इलाज संभव नहीं है. उनको तीन पुत्रियां हैं. सभी शादीशुदा हैं.

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दलदल और बदबू में कैसे रहें

झोंपड़ीनुमा घर में गुजर-बसर करनेवाले गजाधर के घर से पानी निकलने के बाद घर की स्थिति दलदल जैसी थी. बदबू से रहना मुश्किल हो रहा था. गजाधर की पत्नी उर्मिला ने बताया कि आलू और प्याज आसपास के गांव में बेचकर जो पैसे बचते हैं उसी से किसी तरह खाना पीना चलता है. ऐसे में लगातार वर्षा और बाढ़ के कारण कुछ भी संभव नहीं हो पा रहा था. भूखे रहने के अलावा कोई विकल्प हम लोगों के पास नहीं था. ऐसे में हम अपने पति का इलाज कहां से कराएं.

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