भागलपुर : सृजन समिति 120 करोड़ के बाद 150 करोड़ का भी बनी मालिक

भागलपुर : सरकारी योजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए पद पर बैठाये गये तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह व नाजिर राकेश झा के किये कारनामे रोंगटे खड़े कर दे रहे हैं. भू-अर्जन में हुए सृजन घोटाले की जैसे-जैसे सीबीआई जांच की रिपोर्ट सामने आ रही है, वैसे-वैसे उक्त दोनों के खेले गये खेल […]

भागलपुर : सरकारी योजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए पद पर बैठाये गये तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह व नाजिर राकेश झा के किये कारनामे रोंगटे खड़े कर दे रहे हैं. भू-अर्जन में हुए सृजन घोटाले की जैसे-जैसे सीबीआई जांच की रिपोर्ट सामने आ रही है, वैसे-वैसे उक्त दोनों के खेले गये खेल से भी पर्दा उठ रहा है.
पहले पीरपैंती पावर प्लांट प्रोजेक्ट को लेकर आयी 120 करोड़ की राशि को दो अलग-अलग बैंकर्स चेक के साथ विभागीय पत्र के माध्यम से सृजन समिति के खाते में जमा कराया गया, फिर 150 करोड़ की राशि के साथ भी पूर्व की तरह प्रक्रिया अपना कर सरकारी खाते का बंटाधार कर दिया गया. 150 करोड़ की राशि को पांच चरणों में हुए खेल में सरकारी खाते से निकाला गया. भू-अर्जन की जोड़ी (पदाधिकारी व नाजिर) ने करोड़ों के खेल की इंट्री एकाउंट रजिस्टर में भी नहीं दरसायी, ताकि किसी की नजर न पड़े.
इस कारण ऑडिटर भी समय रहते अवैध निकासी को पकड़ नहीं पाये. छह अगस्त, 2015 को तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह ने चेक संख्या-727002 को बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम से चेक काटा. यह चेक भू-अर्जन कार्यालय के खाते से था. इस चेक के अगले भाग में स्विफ्ट खाते में राशि जमा करने का विवरण था.
विभिन्न चरणों में हुए खेल
पहला चरण : चेक के पीछे तत्कालीन नाजिर राकेश झा ने अपने हाथ से सृजन महिला विकास सहयोग समिति का खाता संख्या लिख दिया. उक्त टिप्पणी को तत्कालीन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह ने अनुमोदित का हस्ताक्षर कर दिया. इस तरह उक्त दोनों ने मिलकर 150 करोड़ रुपये के सरकारी राशि का फंड सृजन समिति के खाते में डायवर्ट कर दिया.
दूसरा चरण : तत्कालीन बैंक ऑफ बड़ौदा के वरीय प्रबंधक वरुण कुमार ने पे-इन स्लिप पर स्वर्गीय मनोरमा देवी का हस्ताक्षर करके उसे भुगतान को लेकर जारी कर दिया.
तीसरा चरण : तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी ने छह जनवरी को विभागीय पत्र संख्या-47 के माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य शाखा प्रबंधक को पत्र लिखा. इसमें चेक संख्या 727002 की राशि 150 करोड़ को सृजन महिला विकास सहयोग समिति के बैंक में खुले खाते में जमा करने का उल्लेख था.
कहा गया कि ग्रामीण अंचल में मुआवजा देने में सुविधा को देखते हुए राशि सृजन समिति के खाते में दी गयी है. सीबीआई टीम को जांच के दौरान यह पत्र बैंक द्वारा प्राप्त किया गया. मगर, इस पत्र को लेकर संबंधित बैंक में प्राप्ति टोकन नहीं मिला.
चौथा चरण : बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक अरुण कुमार सिंह ने 10 जनवरी को पत्र लिखा. यह पत्र क्लर्क वरुण कुमार सिन्हा ने ड्राफ्ट किया था.
उल्लेख हुआ कि भू-अर्जन कार्यालय के पत्र संख्या-47 के आधार पर 150 करोड़ की राशि सृजन समिति के खाते में जमा कर दी गयी. इस तरह भू-अर्जन कार्यालय के खाते में राशि 184 करोड़ 92 लाख 40 हजार 65 रुपये बचे. यह पत्र भू-अर्जन कार्यालय में गया, जहां तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी ने देखा और OK SEEN का हस्ताक्षर किया.
पांचवां चरण : भू-अर्जन के एकाउंट रजिस्टर में लिखने वाले नाजिर राकेश झा ने निकाले गये 150 करोड़ व पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट की 120 करोड़ से अधिक की राशि को सृजन समिति के खाते में देने का जिक्र नहीं किया. जबकि एकाउंट रजिस्टर का कस्टोडियन तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह व नाजिर राकेश झा थे.

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