भागलपुर : बारिश का मौसम शुरू होते ही प्राइवेट बस स्टैंड बदहाल हो गया. यात्रियों को मैला व कीचड़ से पार होकर गंतव्य की ओर जाना पड़ रहा है. इतना ही नहीं एक-एक बस से 220 रुपये तक पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है और यात्रियों के लिए सुविधा शून्य है. खुलती हैं 300 गाड़ियां, […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
भागलपुर : बारिश का मौसम शुरू होते ही प्राइवेट बस स्टैंड बदहाल हो गया. यात्रियों को मैला व कीचड़ से पार होकर गंतव्य की ओर जाना पड़ रहा है. इतना ही नहीं एक-एक बस से 220 रुपये तक पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है और यात्रियों के लिए सुविधा शून्य है. खुलती हैं 300 गाड़ियां, आते हैं 5000 यात्री: लोहिया पुल के नीचे स्थित प्राइवेड बस स्टैंड रेलवे की जमीन पर है.
यहां पर प्रतिदिन पूर्णिया, कटिहार, गोड्डा, कोलकाता, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा, देवघर समेत विभिन्न जिले के लिए 250 से 300 छोटी-बड़ी गाड़ियां आती हैं. बड़ी गाड़ियों पर 50 से 60 यात्री, जबकि छोटी गाड़ियों पर आठ से 10 यात्री आते हैं. कुल मिला कर रोजाना 5000 से अधिक यात्रियों का आना-जाना होता है. फिर भी न यहां पर पेयजल की सुविधा है, न शौचालय की. और तो और जो यात्री शेड बने हैं, वह इतना जर्जर है कि कभी भी ढह सकता है.
प्रतिदिन 10 लाख की कमाई, फिर भी सुविधा नहीं: मोटर मजदूर संघ के अध्यक्ष हरिप्रकाश उपाध्याय ने बताया कि तीन वर्ष पहले तक यहां पर बस स्टैंड परिसर पक्कीकरण था, जबकि पुराने शौचालय को तोड़ने के बाद टंकी का सारा मैला परिसर में ही फेंक दिया गया. बारिश होने के बाद यही कीचड़ के रूप में इधर-उधर बहने लगता है. उन्होंने बताया कि इस बस स्टैंड के कारण रेलवे को 10 लाख रुपये की कमाई होती है. यदि यहां पर यात्री नहीं उतरेंगे तो रेलवे का टिकट की बुकिंग कम हो जायेगी.