खास बातें
Dilip Ghosh Minister West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी भाजपा के उत्थान की बात होगी, दिलीप घोष का नाम सबसे ऊपर आयेगा. शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शुभेंदु अधिकारी के साथ मंत्री पद की शपथ लेने वाले दिलीप घोष आज बंगाल भाजपा के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक हैं.
नयी सरकार में ‘एंकर ऑफ कैबिनेट’ हैं दिलीप घोष
एक साधारण स्वयंसेवक से प्रदेश अध्यक्ष, सांसद और अब कैबिनेट मंत्री तक का उनका सफर संघर्षों, विवादों और संगठन को मजबूत करने की अटूट जिद की कहानी है. खड़गपुर सदर से निर्वाचित होकर आये दिलीप घोष को नयी सरकार में अनुभव का लंगर (Anchor of Cabinet) माना जा रहा है.
अंडमान के जंगलों से बंगाल की सियासत तक
दिलीप घोष का राजनीतिक आधार उनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्ठभूमि है. 1984 में आरएसएस के साथ सफर शुरू करने वाले दिलीप घोष ने दशकों तक संगठन के लिए काम किया. 1999 से 2007 के बीच वे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आरएसएस के प्रभारी थे.
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2014 में संघ से भाजपा में आये दिलीप घोष
अंडमान में कठिन भौगोलिक और राजनीतिक हालातों में काम करने के अनुभव ने उन्हें एक सख्त और अनुशासित संगठनकर्ता बनाया. 2014 में उन्हें संघ से भाजपा में भेजा गया. 2015 में उन्हें ऐसे समय में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जब बंगाल में भाजपा का वजूद कुछ भी नहीं था.
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वो जीत, जिसने हिला दी कांग्रेस की विरासत
दिलीप घोष ने अपना पहला चुनावी धमाका वर्ष 2016 में किया. खड़गपुर सदर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्ञान सिंह सोहनपाल (चाचा) को हराया, जो वहां से लगातार 7 बार विधायक रह चुके थे. घोष के नेतृत्व में ही भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. ‘19 में हाफ, 21 में साफ’ का मशहूर नारा उन्होंने ही दिया था.
बंगाल में फायरब्रांड नेता की छवि
अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए मशहूर दिलीप घोष ने बंगाल के ग्रामीण इलाकों और आदिवासी बेल्ट (जंगलमहल) में भाजपा को घर-घर तक पहुंचाया.
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Dilip Ghosh Minister West Bengal: नयी सरकार में दिलीप घोष की अहमियत
शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट में दिलीप घोष का होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है. शुभेंदु अधिकारी और नीशीथ प्रमाणिक युवा जोश का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो दिलीप घोष संगठन के पुराने और वफादार कैडर का भरोसा हैं. वे अक्सर कहते हैं- आरएसएस ने हमें लोगों के साथ घुलना-मिलना सिखाया है. अब उनके इसी अनुभव का इस्तेमाल बंगाल की चरमरायी कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को पटरी पर लाने में किया जायेगा.
बंगाल में भाजपा की नींव को पत्थर की तरह मजबूत किया
खड़गपुर से कोलकाता तक के इस सफर में दिलीप घोष ने कई हमले झेले और अनगिनत विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया. आज जब वे मंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, तो यह उनके उस संघर्ष का इनाम है, जिसने बंगाल में भाजपा की नींव को पत्थर की तरह मजबूत कर दिया.
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