टीएमबीयू ने तरकीब ढूंढी. इस तरकीब से जहां किसी को अपने टॉपर बेटे पर मान होगा तो किसी के लिए माता-पिता को सम्मान देने का अरमान भी पूरा होगा. विश्वविद्यालय के कोष में 75 हजार रुपये जमा करवाने पर टॉपरों को दिए जाने वाले मेडल में संबंधित व्यक्ति के माता-पिता का नाम भी दर्ज होगा. प्रतिभाशाली छात्र को अपने तेजस्वी होने पर मान होगा तो मेडल के साथ खास शख्सियतों के माता-पिता का सम्मान जुड़ा होगा. इसके तहत विश्वविद्यालय कोष में अब तक तीन लाख रुपये जमा हो चुके हैं.
इस परंपरा की शुरुआत खुद कुलपति प्रो नलिनी कांत झा ने की है. उन्होंने सबसे पहले 75 हजार रुपये की राशि जमा करवायी. वह पीजी संस्कृत के टॉपर को मेडल देेंगे. इसमें उनके पिता आचार्य पंडित श्यामाकांत झा की यादें जुड़ी होंगी. इसी तरह सीसी मुखर्जी रोड निवासी डॉ अश्विनी कुमार चौधरी ने अपनी माता शीला चौधरी की याद में 75 हजार रुपये जमा करवाये हैं. उनके पैसे से ग्रेजुएशन टॉपर को मेडल दिया जायेगा. इसके अलावा इतिहास विभाग के प्रो अरुण कुमार झा और एनसिएंट हिस्ट्री के प्रो राजीव कुमार सिन्हा ने भी अपने माता-पिता की याद में मेडल देने के लिए विभाग के कोष में 75-75 हजार रुपये जमा करवाये हैं.
