Pooja Devi Murder: बगहा व्यवहार न्यायालय ने स्वाभिमान बटालियन की महिला कर्मी पूजा देवी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी अजय सिंह उर्फ कृष्णा कुमार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.
कार्यस्थल पर हुई थी दोनों की पहचान
अभियोजन के अनुसार, अजय सिंह वाल्मीकिनगर स्थित स्वाभिमान बटालियन में मुंशी के पद पर कार्यरत था, जबकि पूजा देवी वहीं भोजन बनाने का काम करती थीं. दोनों की पहचान कार्यस्थल पर हुई थी और उनके बीच प्रेम संबंध होने की बात भी जांच में सामने आई.
घटना से पहले दोनों को एक साथ देखा गया था, जबकि अगले दिन पूजा देवी का शव पानी में मिला था.
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोली हत्या की परतें
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने अदालत के समक्ष मोबाइल टावर लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए.
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि पूजा देवी की मौत डूबने से नहीं, बल्कि गला दबाकर हत्या किए जाने से हुई थी. अदालत ने माना कि हत्या के बाद शव को नहर में फेंककर इसे दुर्घटनावश डूबने का रूप देने की कोशिश की गई.
आरोपी के खिलाफ ये साक्ष्य बने अहम
| साक्ष्य | जांच में सामने आई बात |
| मोबाइल टावर लोकेशन | घटना के समय आरोपी की मौजूदगी |
| कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) | दोनों के बीच संपर्क की पुष्टि |
| पोस्टमार्टम रिपोर्ट | गला दबाकर हत्या की पुष्टि |
| फॉरेंसिक रिपोर्ट | डूबने से मौत की संभावना खारिज |
| बरामद मोबाइल | मृतका का मोबाइल आरोपी के कब्जे से मिला |
| प्रत्यक्ष परिस्थितियां | घटना की रात आरोपी को गीले और कीचड़ से सने कपड़ों में देखा गया |
अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला
सजा के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी की पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए नरमी की मांग की, जबकि अभियोजन ने इसे जघन्य अपराध बताते हुए कठोर दंड की मांग की.
अदालत ने सभी परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों को संदेह से परे मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(2) के तहत दोषी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई.
मृतका के आश्रितों को मिलेगी जुर्माने की राशि
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अर्थदंड की राशि जमा होने के बाद इसे मृतका के आश्रितों को भुगतान किया जाएगा. साथ ही न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे गंभीर मामलों में कठोर दंड कानून के प्रति लोगों का विश्वास बनाए रखने और अपराधियों में भय पैदा करने के लिए आवश्यक है.
