Bettiah News: बेतिया के मधुबनी अनुमंडल में प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने प्रबुद्धजनों के साथ आयोजित वैचारिक गोष्ठी में इथेनॉल और चीनी की कीमत को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि इथेनॉल बनने के कारण चीनी महंगी होने की बात सही नहीं है. गन्ने से चीनी बनने की प्रक्रिया और उससे निकलने वाले उप-उत्पादों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन से चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी हो रही है.
इथेनॉल से चीनी महंगी होने की बात गलत
पं. भरत उपाध्याय ने कहा कि लोगों में यह भ्रम है कि गन्ने से इथेनॉल बनने के कारण चीनी का उत्पादन कम हो रहा है और इसी वजह से चीनी महंगी हो रही है. उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि पहले चीनी बनाने की प्रक्रिया और इथेनॉल बनने की प्रक्रिया को समझना जरूरी है.
उनके अनुसार, गन्ने से मुख्य रूप से चीनी बनाई जाती है. चीनी तैयार होने के बाद खोई, शीरा और मैल जैसे उप-उत्पाद निकलते हैं. खोई का इस्तेमाल बॉयलर में ईंधन के तौर पर किया जाता है, जबकि इससे पेपर और पार्टिकल बोर्ड भी बनाया जाता है.
शीरे से बनता है इथेनॉल
पं. भरत उपाध्याय ने बताया कि गन्ने से चीनी बनाने के बाद निकलने वाले शीरे से इथेनॉल तैयार किया जाता है. पहले शीरे से मुख्य रूप से शराब और स्प्रिट बनाई जाती थी. इसकी खपत सीमित होने के कारण बड़ी मात्रा में शीरे को गड्ढों में डाल दिया जाता था या नालों में बहा दिया जाता था.
अब पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग होने के कारण शीरे का उपयोग बढ़ा है. इससे चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है.
कम उत्पादन और ईंधन की महंगाई हो सकती है वजह
उन्होंने कहा कि चीनी महंगी होने के पीछे कम उत्पादन और ईंधन की बढ़ती कीमत जैसे कई कारण हो सकते हैं. इसके अलावा सरकार की नीतियों और प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं.
पं. भरत उपाध्याय ने दावा किया कि यदि इथेनॉल का उत्पादन बंद कर दिया जाए तो चीनी की कीमत और अधिक बढ़ सकती है.
गोष्ठी में कई प्रबुद्ध लोग रहे मौजूद
वैचारिक गोष्ठी में पूर्व प्राचार्य राणा प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य जगदीश नारायण सिंह, दिनेश कुमार गुप्ता, सुनील कुमार सिंह, आकाश मिश्रा सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे.
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