Valmiki Tiger Reserve: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) को जल्द ही बाघों के साथ-साथ एक सींग वाले भारतीय गैंडों के सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है. वन विभाग ने गैंडा पुनर्वास योजना को लेकर तकनीकी और मैदानी स्तर पर काम शुरू कर दिया है.
यदि योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में वीटीआर के जंगलों और घास के मैदानों में गैंडों की संख्या बढ़ती दिखाई दे सकती है.
वन अधिकारियों को मिला आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण
गैंडा संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए वाल्मीकि सभागार में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इसमें डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के गैंडा विशेषज्ञ अमित शर्मा (असम) और रोहित कुमार (दुधवा टाइगर रिजर्व) ने वन अधिकारियों और वनकर्मियों को गैंडों की पहचान, निगरानी, रेडियो टेलीमेट्री और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया.
जीपीएस और ड्रोन से होगी निगरानी
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि गैंडों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीएचएफ और जीपीएस आधारित ट्रांसमीटर का उपयोग किया जाएगा.
इसके अलावा ड्रोन कैमरे, जीपीएस मैपिंग और कैमरा ट्रैप की मदद से घने जंगलों में भी गैंडों की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाएगी.
प्राकृतिक निशानों से होगी पहचान
वनकर्मियों को यह भी सिखाया गया कि सींग की बनावट, शरीर पर बने प्राकृतिक निशान, पदचिह्न और विष्ठा के आधार पर प्रत्येक गैंडे की अलग पहचान कैसे की जाती है.
मैदानी प्रशिक्षण में सुरक्षित गश्त, हाथियों की मदद से निगरानी, आपात स्थिति में बचाव, गैंडों के स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन तथा शिकार रोधी अभियान चलाने का भी अभ्यास कराया गया.
गैंडा संरक्षण केंद्र और विशेष कार्यबल की तैयारी
कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक (सीएफ) गौरव ओझा ने कहा कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित वनकर्मियों के समन्वय से वीटीआर में गैंडा संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी.
उन्होंने बताया कि वन विभाग गैंडा संरक्षण केंद्र स्थापित करने और "गैंडा कार्य बल" के गठन की दिशा में भी काम कर रहा है.
फिलहाल दो गैंडों पर रखी जा रही विशेष नजर
वन विभाग के अनुसार, वर्तमान में वीटीआर में मौजूद दो गैंडों की विशेष निगरानी और देखभाल की जा रही है.
अधिकारियों का मानना है कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की अनुकूल जलवायु, घने वन और विस्तृत घास के मैदान भविष्य में गैंडों के लिए आदर्श आवास साबित होंगे. प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीएफओ विकास अहलावत, रेंजर, वनपाल और कई अन्य वन अधिकारी भी मौजूद रहे.
