आठ माह में 10 हजार मरीजों को फिजियोथैरेपी

फिजियोथैरेपी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विरेन्द्र कुमार ने बताया कि फिजियोथैरेपी के लिए आने वाले मरीजों में युवा वर्ग की अच्छी खासी संख्या है.

बेतिया . वर्तमान समय में हड्डियों के जोड़ों में दर्द आम बात हो गई हैं. लेकिन अगर ससमय इसपर ध्यान नहीं दिया गया. तो यह समस्या गंभीर हो सकती हैं. आंकड़ों के मुताबिक इन दिनों लोग ओस्टियोआर्थराइटिस की समस्या से ज्यादा जूझ रहे हैं. निजी क्लीनिकों की बात तो दूर, अगर सिर्फ जीएमसीएच के आंकड़ों की बात करें तो यहां विगत आठ महीने में 10419 मरीज फिजियोथैरेपी के लिए आ चुके हैं. फिजियोथैरेपी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विरेन्द्र कुमार ने बताया कि फिजियोथैरेपी के लिए आने वाले मरीजों में युवा वर्ग की अच्छी खासी संख्या हैं. अधिकांश ऐसे लोग हैं जो दवा लेने से पहले फिजियोथैरेपी के माध्यम से अपने मर्ज को ठीक करना चाहते हैं, और इसमें कहीं दो मत नहीं है कि फिजियोथैरेपी से 90 फीसदी लोगों को राहत मिल जाती हैं. सोने व दिनचर्या में लापरवाही तथा शारीरिक शिथिलता बरतने वाले पुरुष व महिला इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस बीमारी के शिकार होने पर युवा चिकित्सकीय परामर्श के बिना ही गूगल पर सर्च करके दर्द निवारक दवा ले लेते हैं. जिसका परिणाम घातक हो रहा हैं. ओस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ के अंदर मौजूद कार्टिलेज नष्ट होने लगते हैं. जिसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन होने लगता हैं. मरीज को चलने, बैठने, खड़ा होने, सीढ़ी चढ़ने में दर्द महसूस होता हैं. इससे बचने के लिए हड्डी की उचित देखभाल बहुत जरूरी हैं. एचओडी डॉ वीरेंद्र के मुताबिक जिले मे सबसे ज्यादा 35 फीसदी सर्वाइकल स्पोंडलाईसिस के मरीज फिजियोथैरेपी के लिए आ रहे हैं. गलत तरीके से सोने व मोटा तकिया उपयोग करने के कारण गर्दन से लेकर रीड की हड्डी तक दर्द होता हैं. बाद में हाथों में भी तकलीफ शुरू हो जाती हैं. भारी वजन उठाने, बगैर विशेषज्ञ के एक्सरसाइज करने, गिरने या मामूली दुर्घटना मे घायल व्यक्ति का सही इलाज नहीं कराने से लो बैक पेन की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं. ऐसे मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत हैं. जबकि ऑस्टो ऑर्थोराइटिस मरीजों की संख्या 15 फीसदी हैं. उसी तरह प्री आर्थराइटिस मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक है.

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