Valmikinagar News: मानसून की पहली बारिश के साथ ही वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगल इन दिनों कुसुम (कोसम) के फलों से महक उठे हैं. पीले और नारंगी रंग में पकने वाला यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे और रसीले स्वाद के कारण बच्चों की पहली पसंद बन गया है. सुबह से ही गांवों के बच्चे पेड़ों के नीचे फल गिरने का इंतजार करते हैं, जबकि कई बच्चे पेड़ों पर चढ़कर कुसुम तोड़ते नजर आ रहे हैं.
Valmiki Tiger Reserve News: जंगलों में लौट आई बचपन की रौनक
जंगलों के किनारे बच्चों की चहल-पहल से पूरे इलाके में पुराने दिनों की यादें ताजा हो रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मानसून के दौरान सीमित समय के लिए मिलने वाला कुसुम का फल प्रकृति की अनमोल सौगात है, जिसका हर वर्ष बेसब्री से इंतजार किया जाता है. बाहर से सख्त और अंदर से रसीले इस फल का स्वाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
स्वाद के साथ रोजगार और परंपरा से भी जुड़ा है कुसुम
कुसुम केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके बीजों से कुसुम तेल निकाला जाता है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे इन्हीं बीजों से बालियां, माला और छोटे-छोटे खिलौने तैयार करते हैं. यह परंपरा आज भी गांवों में जीवित है.
जैव विविधता के लिए भी अहम है कुसुम का वृक्ष
कृषि वैज्ञानिक विनय कुमार सिंह ने बताया कि कुसुम सोपबेरी परिवार का वृक्ष है और वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में इसकी अच्छी संख्या मौजूद है. इसके पत्ते चीतल, बंदर समेत कई शाकाहारी वन्यजीवों के लिए पौष्टिक भोजन का स्रोत हैं. यही कारण है कि कुसुम का वृक्ष जंगलों की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
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