दिल्ली के अखाड़े में चमकी मैनाटांड़ की बेटी, सुनीता की जीत ने रचा इतिहास
संघर्ष, साधना और संकल्प की मिसाल बनकर पश्चिम चंपारण की बेटी सुनीता ने राजधानी दिल्ली में इतिहास रच दिया.
मैनाटांड़. संघर्ष, साधना और संकल्प की मिसाल बनकर पश्चिम चंपारण की बेटी सुनीता ने राजधानी दिल्ली में इतिहास रच दिया. 29-30 दिसंबर को आयोजित प्रथम राष्ट्रीय तमो मार्शल आर्ट चैंपियनशिप 2025-26 में मैनाटांड़ प्रखंड के बरवा परसौनी गांव की सुनीता ने जब स्वर्ण पदक अपने नाम किया, तो यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उन अनगिनत सपनों की जीत थी, जो सीमित संसाधनों और कठिन हालातों के बीच पनपते हैं. छोटे से गांव से निकलकर देशभर के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच खड़ा होना ही बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन सुनीता ने अपने आत्मविश्वास, कठोर अभ्यास और अदम्य साहस से हर चुनौती को परास्त कर दिया. मुकाबले के हर पल में उनकी आंखों में जुनून और चेहरे पर आत्मविश्वास झलकता रहा. जब निर्णायक क्षण आया और स्वर्ण पदक की घोषणा हुई, तो वह पल भावनाओं से भरा हुआ था, आंखें नम थीं, लेकिन गर्व से सिर ऊंचा. यह राष्ट्रीय चैंपियनशिप तमो के अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन मेजर जनरल डॉ. दिलावर सिंह के मार्गदर्शन और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र सिंह संधू की देखरेख में संपन्न हुई. देश के कोने-कोने से आए खिलाड़ियों के बीच सुनीता की यह जीत बिहार और खासकर पश्चिम चंपारण के लिए गर्व का क्षण बन गई. सुनीता की इस ऐतिहासिक सफलता से जिले मे खुशी की लहर दौड़ गई. घर-आंगन से लेकर गांव की गलियों तक गर्व और उत्साह का माहौल है. लोग इसे बेटियों की शक्ति, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का प्रतीक मान रहे हैं. खेल विभाग और समस्त बिहारवासियों की ओर से सुनीता को इस अद्भुत उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी गई है. उनकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है, यह संदेश देती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंच छोटा नहीं और कोई भी सपना बड़ा नहीं. उम्मीद है कि सुनीता आने वाले समय में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी.
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