Bettiah News: नगर स्थित महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय में नई शिक्षा नीति (एनईपी) एवं सीबीसीएस पाठ्यक्रम के तहत इंटर्नशिप की अनिवार्यता और उपयोगिता पर आधारित कार्यशाला का आयोजन परीक्षा हॉल में किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नवल किशोर बैठा ने की.
इंटर्नशिप डिग्री और रोजगार के बीच का पुल
प्राचार्य डॉ. बैठा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करना है. उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप छात्रों के शैक्षणिक ज्ञान और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच की दूरी को कम करती है.
उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप से छात्रों में आत्मविश्वास और व्यावहारिक समझ विकसित होती है. संक्षेप में, नई शिक्षा नीति के तहत इंटर्नशिप डिग्री को रोजगार से जोड़ने वाला एक मजबूत पुल है.
छात्रों को मिलेंगे 21वीं सदी के जरूरी कौशल
कार्यशाला के संयोजक डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि इंटर्नशिप के माध्यम से छात्रों में कम्युनिकेशन, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसे 21वीं सदी के महत्वपूर्ण कौशल विकसित होते हैं. इससे छात्रों को सही करियर चुनने और प्लेसमेंट से पहले ही उद्योग जगत से जुड़ने का अवसर मिलता है. उन्होंने बताया कि अब इंटर्नशिप के क्रेडिट भी एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) में जोड़े जाएंगे.
यह भी पढ़ें: बेतिया में शिक्षा विभाग में नए डीपीओ को मिला प्रभार, दो सप्ताह बाद पटरी पर लौटा कामकाज
नेटवर्किंग और कमाई का भी अवसर
भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. हफीजुर्रहमान ने कहा कि इंटर्नशिप से छात्रों की डिजिटल स्किल्स, टीमवर्क और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होती है.
भूगोल विभाग के प्राध्यापक एवं महाविद्यालय के बर्सर डॉ. योगेन्द्र सम्यक ने कहा कि इंटर्नशिप के दौरान छात्रों का उद्योग जगत से संपर्क बनता है, जो भविष्य में प्लेसमेंट में सहायक होता है. उन्होंने बताया कि कई इंटर्नशिप स्टाइपेंड आधारित होती हैं, जिससे पढ़ाई के साथ आय का अवसर भी मिलता है.
कार्यशाला का संचालन एडुटेक सिस्टम के निदेशक ई. शांतनु कुमार ने किया. इस अवसर पर डॉ. गौतम कुमार, डॉ. किशोरी लाल और डॉ. प्रेम कुमार सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे.
