आजादी के दशकों बाद भी खाट ही बनी एंबुलेंस, दोन की इस तस्वीर ने खोल दी विकास की जमीनी हकीकत

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच बसे दोन क्षेत्र के ग्रामीण आज भी सड़क, पुल-पुलिया और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बरसात के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है, जहां गंभीर मरीजों को खाट पर लिटाकर अस्पताल ले जाने की नौबत आती है.

Bagaha News: हरनाटांड़ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (बीटीआर) के घने जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे दोन क्षेत्र के ग्रामीण आज भी सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य और नियमित आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बरसात के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है. सोमवार को गर्दी दोन निवासी शुताही महतो की पत्नी कुमारी देवी (55) की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें खाट पर लिटाकर नौरंगिया स्थित निजी अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए.

खाट पर मरीज को अस्पताल ले जाने की मजबूरी

रामनगर प्रखंड की नौरंगिया पंचायत के गर्दी दोन क्षेत्र में बारिश के कारण सड़कें खराब हैं. वहीं गांव में इलाज की समुचित सुविधा और आवागमन के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं.

सोमवार को कुमारी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें खाट पर लिटाया और नौरंगिया स्थित निजी अस्पताल पहुंचाया. इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार बताया गया.

हरहा नदी में पानी बढ़ने से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार लगातार बारिश के कारण हरहा नदी में पानी बढ़ गया है. क्षेत्र की सड़कें भी जगह-जगह खराब हैं. ऐसे में बड़े वाहनों का आवागमन लगभग ठप हो जाता है. साइकिल और मोटरसाइकिल से ही किसी तरह आवागमन हो पाता है.

गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खाट, ट्रैक्टर या अन्य स्थानीय साधनों का सहारा लेना पड़ता है.

22 किलोमीटर दूर हरनाटांड़ पहुंचना चुनौती

समाजसेवी देवराज महतो ने बताया कि बरसात में किसी मरीज की तबीयत बिगड़ने पर करीब 22 किलोमीटर दूर हरनाटांड़ तक पहुंचना चुनौती बन जाता है. रास्ते में कई बार नदी-नालों को पार करना पड़ता है. साधन उपलब्ध नहीं होने पर मरीज को ट्रैक्टर से ले जाने की मजबूरी रहती है.

समाजसेवी अजय कुमार ने कहा कि हरहा नदी में पानी अधिक होने के कारण मरीज को हरनाटांड़ ले जाना मुश्किल है. इसी वजह से कुमारी देवी को नौरंगिया के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

आजादी के दशकों बाद भी विकास की बाट जोह रहा दोन

दोन क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि देश को आजाद हुए दशकों बीत गए, लेकिन उनका इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य केंद्र, नियमित परिवहन और बरसात में सुरक्षित आवागमन की सुविधा का अभाव है.

ग्रामीणों के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए उन्हें दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता है. आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है.

पुल, सड़क और स्वास्थ्य केंद्र की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हरहा नदी पर स्थायी पुल-पुलिया बनाने, सड़क व्यवस्था बेहतर करने, दोन क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने और बरसात में वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावों के बीच दोन क्षेत्र के लोगों को अब भी खाट पर मरीज ढोने की मजबूरी से मुक्ति का इंतजार है.

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By Jay prakash verma

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