साइबर ठगी या संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन की जांच के दौरान बैंक खाता फ्रीज होने से परेशान खाताधारकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (जीआरएम) पोर्टल के माध्यम से एक नई और सुगम व्यवस्था लागू की है. इसके तहत अब खाताधारकों को संबंधित थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया सीधे बैंक के माध्यम से शुरू होगी और पूरे मामले का निस्तारण ऑनलाइन किया जाएगा.
अब तक दूसरे राज्यों के चक्कर काटने को मजबूर थे खाताधारक
अब तक की व्यवस्था के अनुसार, साइबर अपराध की जांच के दौरान किसी का बैंक खाता फ्रीज होने पर खाताधारक को उसी पुलिस थाने से संपर्क करना पड़ता था, जिसने खाते को फ्रीज कराया था. कई मामलों में यह थाना दूसरे राज्यों में सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर होता था. ऐसे में खाताधारकों को बार-बार लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था और महीनों तक राहत नहीं मिलती थी.
बैंक शाखा में आवेदन देते ही शुरू हो जाएगी ऑनलाइन प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत खाताधारक को अपनी संबंधित बैंक शाखा में आवेदन देना होगा. बैंक ग्राहक के केवाईसी (KYC) और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर जीआरएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करेगा तथा एक ग्रिवांस आईडी जारी करेगा. इसके बाद शिकायत सीधे संबंधित पुलिस थाने और जांच अधिकारी (IO) के पास ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगी.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दर्ज हो सकेगा बयान
जांच अधिकारी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की समीक्षा करेंगे. आवश्यकता पड़ने पर खाताधारक का बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी लिया जा सकेगा. जांच पूरी होने के बाद खाते को अनफ्रीज करने या लियन हटाने का निर्णय लिया जाएगा. बेतिया के साइबर डीएसपी गौतम शरण ओमी ने बताया कि जीआरएम पोर्टल लागू होने से शिकायतों का निस्तारण अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक होगा. इससे सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जिनके खाते दूसरे राज्यों की पुलिस ने फ्रीज किए हैं.
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