बाघ का खौफ ऐसा कि अकेले खेत जाने से डर रहे किसान, ड्रोन से हो रही निगरानी

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास बाघ के हमले के बाद भेड़ीहारी इलाके में किसानों के बीच खौफ का माहौल है. खेती का काम जरूरी होने के बावजूद, वे अकेले खेत जाने से कतरा रहे हैं और वनकर्मियों की निगरानी में ही खेतों तक पहुंच पा रहे हैं. वन विभाग ड्रोन कैमरों और गश्ती दलों की मदद से बाघ की तलाश कर रहा है.

West Champaran News: वाल्मीकिनगर. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे भेड़ीहारी इलाके में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद अब भी खेतों में डर का माहौल बना हुआ है. खेती का मौसम होने के बावजूद किसान अकेले खेत जाने से बच रहे हैं. फसलों की देखभाल के लिए कई लोग वनकर्मियों की निगरानी में खेतों तक पहुंच रहे हैं. वन विभाग ने भी इलाके में गश्त और निगरानी बढ़ा दी है.

Valmikinagar News: बाघ के डर से अकेले खेत जाने से बच रहे किसान

ग्रामीणों का कहना है कि फसल की देखभाल करना जरूरी है, लेकिन बाघ की मौजूदगी की आशंका के बीच अकेले खेत जाना जोखिम भरा लग रहा है. ऐसे में किसान समूह में खेत पहुंच रहे हैं और वनकर्मियों की मौजूदगी से उन्हें कुछ हद तक सुरक्षा का भरोसा मिल रहा है.

वनकर्मियों की लगातार गश्त, ट्रैकिंग टीम सक्रिय

रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि संवेदनशील खेतों और सरेह के आसपास वनकर्मियों की लगातार गश्त जारी है. ट्रैकिंग टीम बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही है, ताकि उसकी आवाजाही वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके.

ड्रोन कैमरों से भी बाघ की तलाश

वन विभाग की ओर से बाघ की तलाश के लिए ड्रोन कैमरों और गश्ती दलों की मदद ली जा रही है. विभाग का प्रयास है कि बाघ की सटीक लोकेशन का पता लगाया जाए और उसे सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजा जा सके.

समूह में खेत जाने और सावधानी बरतने की अपील

वन विभाग ने किसानों से समूह में खेत जाने की अपील की है. सुबह और शाम के संवेदनशील समय में विशेष सतर्कता बरतने तथा झाड़ियों और ऊंची फसल वाले हिस्सों में अकेले नहीं जाने की सलाह दी गई है.

ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए लाउडस्पीकर के माध्यम से भी लगातार एहतियाती संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं.

खेती और सुरक्षा साथ-साथ चल रही

ग्रामीणों का कहना है कि खेती का काम लंबे समय तक टालना संभव नहीं है. फसल की देखभाल के लिए खेत जाना ही पड़ेगा, लेकिन बाघ के डर के कारण अब हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ रहा है.

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक बाघ की गतिविधियां पूरी तरह जंगल तक सीमित नहीं हो जातीं, तब तक अतिरिक्त सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है.

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By Prabhat khabar news desk

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