बेतिया से गणेश वर्मा की रिपोर्ट
Bettiah News: पश्चिम चंपारण के बेतिया अंचल कार्यालय में मंगलवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. कार्रवाई के बाद अंचल कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों के बीच पूरे दिन इस घटना की चर्चा होती रही.
बताया जा रहा है कि जमाबंदी से जुड़े एक मामले में रिश्वत की मांग की गई थी, जिसकी शिकायत निगरानी विभाग तक पहुंची. शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ लिया.
जमाबंदी चालू कराने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बारवत प्रसारेन निवासी बालेश्वर महतो की बंद पड़ी जमाबंदी को दोबारा चालू कराने के नाम पर डाटा एंट्री ऑपरेटर ने 15 हजार रुपये की मांग की थी.
रिश्वत की मांग से परेशान होकर पीड़ित ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की.
सत्यापन में सही मिली शिकायत
निगरानी विभाग ने शिकायत की जांच की जिम्मेदारी जांच अधिकारी राहुल कुमार को सौंपी. जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए. इसके बाद निगरानी विभाग ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई.
मंगलवार को शिकायतकर्ता जैसे ही रिश्वत की रकम लेकर अंचल कार्यालय पहुंचा और आरोपी को पैसे दिए, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तारी के बाद कार्यालय में मची हलचल
कार्रवाई के बाद अंचल कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. निगरानी टीम ने आरोपी को हिरासत में लेने के बाद कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों की भी जांच की. इस दौरान टीम ने अंचलाधिकारी नगमा तबस्सुम से भी कुछ मामलों में जानकारी प्राप्त की.
कई अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई
इस छापेमारी का नेतृत्व टीम लीडर श्याम बाबू प्रसाद श्रीवास्तव ने किया. कार्रवाई में देवीलाल श्रीवास्तव, आशीष चौबे, दिग्विजय सिंह, कृष्ण जीवन कुमार श्रीवास्तव, राहुल कुमार, कृष्णा सिंह, वासिम अहमद, हिमांशु सिंह समेत सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे.
निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी, चनपटिया थाना क्षेत्र के पकड़हर गांव निवासी प्रमोद मिश्रा का पुत्र है. आवश्यक पूछताछ के बाद उसे निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा.
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
बेतिया अंचल कार्यालय में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की बड़ी सफलता मानी जा रही है. वहीं सरकारी कार्यालय में रिश्वत लेते कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
