Begusarai News: थाने में तीन साल नहीं हुआ हल, गांव की अदालत ने सुलझाया 'पति-पत्नी और वो' का विवाद

नीमा पंचायत ने एक अनोखे फैसले से बिगड़ते परिवार को बचाया। 3 साल तक थाने में भटकने के बाद, गांव की अदालत ने 'पति-पत्नी और वो' के जटिल मामले को सुलझा दिया। यह फैसला न केवल एक दांपत्य जीवन को टूटने से बचाने वाला साबित हुआ, बल्कि तीन परिवारों में वर्षों से चला आ रहा तनाव भी समाप्त कर गया।

Begusarai News: सदर प्रखंड की नीमा पंचायत में बुधवार को सामाजिक सौहार्द और न्याय की अनूठी मिसाल देखने को मिली. पंचों ने आपसी सूझबूझ से एक बड़ा फैसला सुनाते हुए बिखर रहे परिवार को फिर से बसा दिया. करीब पांच वर्षों से खिंचता आ रहा पति, पत्नी और वो का त्रिकोणीय पारिवारिक विवाद आखिरकार गांव की अदालत में हमेशा के लिए समाप्त हो गया. इस फैसले से न केवल एक दांपत्य जीवन टूटने से बचा, बल्कि तीन परिवारों में लंबे समय से बना तनाव भी दूर हो गया.

तीन साल थाने के चक्कर, नहीं निकला हल

मामला नीमा वार्ड संख्या 05 निवासी प्रमोद कुमार, उनकी पहली पत्नी आरती देवी और खगड़िया निवासी चांदनी देवी से जुड़ा हुआ था. प्रेम-प्रसंग के इस मामले के कारण तीनों परिवारों की खुशियां छिन चुकी थीं और आए दिन घर में कलह व विवाद की स्थिति बनी रहती थी. न्याय की आस में यह मामला महिला थाने तक भी पहुंचा था, जहां करीब तीन वर्षों तक दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौते की कोशिशें और तारीखें चलती रहीं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. अंततः थक-हारकर पहली पत्नी आरती देवी ने गांव के पंचों की शरण ली.

घंटों चली पंचायती में बनी सर्वसम्मति

ग्रामीणों की पहल पर सरपंच प्रतिनिधि मो. मिकाईल की अध्यक्षता में पंचायत की विशेष बैठक बुलाई गई. इस बैठक में पति प्रमोद कुमार, पत्नी आरती देवी और चांदनी देवी के साथ-साथ तीनों पक्षों के परिजन भी उपस्थित रहे. दोनों पक्षों की दलीलें और भावनाएं सुनने के बाद पंचों ने घंटों विचार-विमर्श किया. इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय दिया गया कि प्रमोद अपनी पहली पत्नी आरती के साथ सारे पुराने गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से गृहस्थ जीवन बिताएंगे.

प्रेमिका को पति के हवाले किया गया

वहीं मामले के दूसरे पहलू को सुलझाते हुए चांदनी देवी को उसके पहले पति को सौंपने का निर्णय हुआ. इसके लिए उनके पति को कटिहार से नीमा बुलाया गया था. दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी के बाद विधिवत कागजी लिखा-पढ़ी की गई और चांदनी को उनके पति के हवाले कर दिया गया. तीनों पक्षों ने पंचों के इस निर्णय को सहर्ष स्वीकार करते हुए सुलहनामा पर अपने हस्ताक्षर किए.

एक-दूसरे को माला पहनाकर ली कसमें

फैसले के बाद प्रमोद और उनकी पत्नी आरती देवी ने पंचों और ग्रामीणों को साक्षी मानकर एक-दूसरे को जयमाला पहनाई और जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया. इस फैसले के गवाह मुखिया प्रतिनिधि अजीत कुमार सहित पंचायत के कई प्रबुद्ध व गणमान्य लोग बने. स्थानीय ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि "जो मामला तीन साल तक थाने के चक्कर काटने के बाद भी नहीं सुलझ सका, उसे हमारे गांव की पंचायत ने एक दिन में सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटा दिया." पंचायत के इस न्याय की पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है.

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By विपिन कुमार मिश्र

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