Begusarai News : गढ़पुरा प्रखंड के सोनमा गांव निवासी 35 वर्षीय अवधेश पासवान की परदेस जाते समय हुई मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. गुरुवार को जैसे ही उनका शव गांव पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया. हर आंख नम थी और पूरे गांव में मातम पसरा रहा.
रोजगार के लिए निकले थे आंध्र प्रदेश
मृतक अवधेश पासवान गांव निवासी रामदुलार पासवान के पुत्र थे. परिजनों के अनुसार वह रोजगार की तलाश में गांव के तीन-चार अन्य लोगों के साथ 2 अगस्त को आंध्र प्रदेश के लिए रवाना हुए थे. मंगलवार को विशाखापट्टनम पहुंचने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. साथियों ने उनकी देखभाल की, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई.
घर लौटते समय ट्रेन में हुई मौत
परिजनों ने किराया भेजकर उन्हें वापस घर लाने की व्यवस्था की. साथी उन्हें दूसरी ट्रेन से लेकर लौट रहे थे, लेकिन उड़ीसा पहुंचने के दौरान ट्रेन में ही अवधेश पासवान ने अंतिम सांस ले ली. घटना की सूचना रेल पुलिस को दी गई. इसके बाद खुर्दा रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद साथ आए लोगों को सौंप दिया.
शव पहुंचते ही मचा कोहराम
गुरुवार को शव गांव पहुंचते ही माता-पिता, पत्नी मनीषा देवी, बच्चों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. घर से उठ रही चीत्कार सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए. महिलाओं की आंखें भी नम हो गईं और पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया.
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ग्रामीणों ने बताया कि अवधेश पासवान मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार व्यक्ति थे. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह अक्सर मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाते थे. उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया.
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प्रवासी मजदूरों की पीड़ा फिर आई सामने
अवधेश पासवान की मौत ने एक बार फिर उन हजारों प्रवासी मजदूर परिवारों की पीड़ा को उजागर कर दिया है, जो बेहतर आजीविका की तलाश में अपने घर-परिवार से दूर जाने को मजबूर होते हैं. इस बार भी एक बेटा परिवार का सहारा बनने निकला था, लेकिन घर लौटी तो केवल उसकी निर्जीव देह. गांव के लोगों का कहना है कि इस अपूरणीय क्षति की भरपाई कभी नहीं हो सकेगी.
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