मटिहानी प्रखंड का महेंद्रपुर गांव एक बार फिर भीषण कटाव की चपेट में, 1962 से ही कटाव का कहर झेल रहे हैं इलाके के लोग

Erosion In Ganges River In Begusarai: बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड का महेंद्रपुर गांव भीषण गंगा कटाव की चपेट में है. 7000 की आबादी डर के साये में जीने को मजबूर है, जानें क्या है पूरा मामला.

Erosion In Ganges River In Begusarai: बेगूसराय जिले के मटिहानी प्रखंड का महेंद्रपुर गांव एक बार फिर गंगा के भीषण कटाव की चपेट में है. गांव के लोगों के लिए गंगा की तेज धारा अब सिर्फ नदी नहीं, बल्कि विस्थापन का डर बन गयी है. लगातार हो रहे कटाव से खेत गंगा में समा रहे हैं और अब नदी की धारा आबादी से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर पहुंच गयी है. स्थिति ऐसी है कि गांव के लोग रात में भी चैन से सो नहीं पा रहे हैं और परिवार के साथ रतजगा करने को मजबूर हैं. करीब सात हजार की आबादी वाले इस गांव के सामने एक बार फिर अपना आशियाना छोड़ने का खतरा खड़ा हो गया है.

रोज कट रही उपजाऊ जमीन, आंखों के सामने गंगा में समा रहे खेत

महेंद्रपुर कृषि और पशुपालन के लिए जाना जाता है. गांव की बड़ी आबादी की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है. लेकिन इन दिनों गंगा लगातार गांव की जमीन को अपने आगोश में ले रही है. ग्रामीणों के अनुसार, कई जगहों पर रोजाना 10 मीटर से अधिक जमीन कटकर नदी में समा रही है. खेतों के बड़े-बड़े हिस्से को अपनी आंखों के सामने नदी में विलीन होते देख ग्रामीणों में भय का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस तेजी से कटाव हो रहा है, उससे अगर इसे तत्काल नहीं रोका गया तो गंगा की धारा आबादी तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लेगी.

1962 से कटाव का दंश झेल रहा है महेंद्रपुर

महेंद्रपुर के लिए गंगा का कटाव कोई नया संकट नहीं है. करीब 100 साल पहले भी इस इलाके में भीषण कटाव हुआ था, जिसमें पुराना महेंद्रपुर गांव पूरी तरह समाप्त हो गया था. इसके बाद वर्ष 1962 से 1965 तक लगातार कटाव हुआ और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए. वर्ष 1972 से 1975 के बीच भी कटाव का सिलसिला जारी रहा. इसके बाद 1981 में भीषण कटाव ने एक बार फिर गांव के अस्तित्व को हिला दिया. कटाव निरोधक कार्य होने के बाद आबादी को पीछे हटकर बसाया गया और कुछ समय के लिए लोगों को राहत मिली.- अंजनी कुमार सिंह, ग्रामीण

Flood In Begusarai: 1990 में तीन बंदबार ने बचाया था गांव

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1990 में गंगा ने एक बार फिर महेंद्रपुर की ओर रुख किया. उस समय गांव को बचाने के लिए तीन बंदबार बनाये गये, जिसके बाद तत्काल कटाव पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया. हालांकि, तब तक बड़ी संख्या में लोग गांव छोड़कर दूसरी जगहों पर बस चुके थे. ग्रामीणों का दावा है कि महेंद्रपुर के कटाव से विस्थापित परिवार आसपास की कई पंचायतों में जाकर बसे. दरियापुर पंचायत की बड़ी आबादी महेंद्रपुर के विस्थापित परिवारों की है. इसके अलावा आजाद नगर कासिमपुर, सोनापुर पंचायत और साफापुर अंबेडकर नगर समेत कई इलाकों में भी महेंद्रपुर से विस्थापित परिवारों ने अपना आशियाना बनाया है. ग्रामीणों के अनुसार, अब तक करीब 10 हजार लोग कटाव के कारण विस्थापित हो चुके हैं.

चार बार उजड़ा, अब पांचवीं बार विस्थापन का डर

वार्ड नंबर 12 के अजय प्रताप सिंह कहते हैं कि महेंद्रपुर के लोग अब तक चार बार गंगा के कटाव के कारण अपना गांव और घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. हर बार आबादी को करीब आधा किलोमीटर से एक किलोमीटर पीछे जाकर बसना पड़ा. कुछ परिवार दूसरी जगहों पर जाकर बस गये. अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर इस बार भी गांव कटता है तो लोगों के पास पीछे हटकर बसने के लिए पर्याप्त जमीन तक नहीं बची है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों में गंगा लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर की ओर कटाव कर चुकी है. अब नदी की धारा गांव से महज 100 मीटर की दूरी पर पहुंच गयी है.

खेतों के बाद आबादी पर नजर, रात में रतजगा कर रहे ग्रामीण

कटाव की रफ्तार ने गांव के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीण दिन में खेतों और कटाव की स्थिति पर नजर रख रहे हैं, जबकि रात में भी परिवारों के साथ जागकर समय गुजार रहे हैं. लोगों को डर है कि अगर अचानक कटाव तेज हुआ तो घरों को खाली करने का समय भी नहीं मिलेगा. सबसे अधिक चिंता उन परिवारों को है, जिनकी जमीन और आजीविका पहले ही गंगा में समा चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से कटाव झेलने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है. हर बार कटाव बढ़ने पर अस्थायी बचाव कार्य किया जाता है और लोग कुछ समय के लिए राहत की सांस लेते हैं, लेकिन कुछ वर्षों बाद समस्या फिर सामने आ जाती है.

सूचना मिलते ही पहुंची अधिकारियों की टीम, शुरू हुआ बचाव कार्य

महेंद्रपुर गांव के समीप कटाव की सूचना मिलने के बाद अधिकारियों की टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया गया है. स्थिति से वरीय अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है. वर्तमान में कटाव स्थल से आवासीय मकानों की दूरी करीब 100 मीटर है. कटाव को तत्काल रोकने के लिए वरीय अधिकारियों के निर्देश पर बांस रोल और झाड़ी के माध्यम से न्यूनतम बाढ़ रक्षात्मक कार्य कराया जा रहा है.- राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल

ग्रामीणों की मांग, स्थायी समाधान के बिना नहीं रुकेगा कटाव का डर

महेंद्रपुर के ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी बचाव कार्य से तत्काल राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है. वर्षों से गंगा के कटाव का सामना कर रहे ग्रामीण अब ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जिससे हर कुछ वर्षों में उन्हें अपना घर और जमीन छोड़कर विस्थापित न होना पड़े. फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कटाव रोकने के लिए बचाव कार्य शुरू किया गया है, लेकिन ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि गंगा की तेज धारा को आबादी तक पहुंचने से रोकने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाये जाते हैं. महेंद्रपुर के लोगों के लिए यह सिर्फ जमीन बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने घर, खेत और गांव के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है.

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By Bipin Kumar Mishra

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