बेगूसराय के तेघड़ा स्थित संत पॉल पब्लिक स्कूल में गुरु पूर्णिमा उत्सव श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. विद्यालय परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया. विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को गुरु-भक्ति के भाव से ओत-प्रोत कर दिया.
गुरु वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों खुशी, नसरीन, जान्या, राधा, सोनम, राशि, कृति और प्रणव द्वारा प्रस्तुत गुरु वंदना "गुरुदेव हमारे दाता हैं, गुरुदेव ही हमारे भाग्य विधाता" से हुई. इस प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया और पूरे सभागार में श्रद्धा का वातावरण बना दिया.
एकांकी 'गुरु ही जीवन का प्रकाश' बनी मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शिक्षक भीम कुमार द्वारा रचित गुरु-भक्ति पर आधारित एकांकी "गुरु ही जीवन का प्रकाश" रही. इसका प्रभावशाली निर्देशन शिक्षिका प्रीति प्रिया ने किया. प्रस्तुति में छात्रा पर्ल, राज नंदिनी तथा छात्र मारुति नंदन, युवराज, राघव कश्यप, अनुराग, रोहन, गोरेश गौरव, अक्षत, सुमित, बलबीर और शुभम ने प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी.
मार्मिक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया भावुक
एकांकी के संवाद, जीवंत अभिनय और गुरु-शिष्य संबंधों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया. कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर दर्शकों ने कई बार तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया. पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में अनुशासन, सौहार्द और गुरु के प्रति सम्मान का भाव स्पष्ट दिखाई दिया.
विद्यालय प्रबंधन ने दिया प्रेरणादायी संदेश
विद्यालय के प्रबंधक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि सच्ची गुरु-भक्ति केवल पूजा या चरण वंदना तक सीमित नहीं होती, बल्कि गुरु के आदर्शों, संस्कारों और उपदेशों को जीवन में अपनाना ही वास्तविक गुरु-भक्ति है. वहीं प्राचार्या तनु सौरभ ने विद्यार्थियों से सत्य, सेवा, अनुशासन, विनम्रता और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया.
शिक्षकों और कर्मियों की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के समन्वयक राम कुमार मिश्रा सहित सुरेंद्र कुमार सिंह, रंजीत कुमार, संजीव कुमार सिंह, प्रेम माधुरी, कंचन कुमारी, प्रफुल्ल कुमार, राकेश कुमार, एस. रामचंद्रन, राम पुनीत राय, अविनाश कुमार तथा विद्यालय के सभी शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
