फरक्का जल संधि पर उमेश कुशवाहा का बड़ा बयान, कहा- 73% बोझ अकेले बिहार उठा रहा, बाढ़-सूखे की मार झेल रहा राज्य

बेगूसराय में जदयू द्वारा आयोजित 'फरक्का जल संधि पर नीतिगत संवाद' कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा शामिल हुए. नेताओं ने कहा कि 1996 की यह संधि बिहार के हितों के खिलाफ है और इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73% बोझ अकेला बिहार उठा रहा है. जदयू नेताओं ने इस संधि का नवीनीकरण न करने और बिहार की 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने की मांग की.

Farakka Water Treaty Bihar : बेगूसराय में जदयू के 'फरक्का जल संधि पर नीतिगत संवाद' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद होना है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं.

इस जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ 5 सितम्बर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा, क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है.

दिखाई गई विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म

इस मौके पर बेगूसराय के बी.पी. मंडल प्रेक्षागृह सभागार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विधायक अभिषेक आनंद, पूर्व विधायक राजकुमार सिंह, पूर्व एमएलसी एवं पूर्व जिलाध्यक्ष रूदल राय, भूमिपाल राय, प्रदेश महासचिव सह कार्यक्रम प्रभारी शंभू कुशवाहा, जिला प्रभारी शिवदत्त सिंह, जिलाध्यक्ष नंदलाल राय, नगर अध्यक्ष पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और कार्यकर्तागण मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई.

1996 की संधि बिहार के हित में नहीं

मौके पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है. इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ गया है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं. श्री झा ने आगे कहा कि फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूसेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) तक रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूसेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है.

यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है. बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय संधि का 73% बोझ अकेले बिहार पर, बाढ़ और सूखे का दोहरा दंश

प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि हमारे सर्वमान्य नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा हो जाने से नदी का तल ऊंचा हो गया है, जिसके कारण उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में हमें बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है और हमारे कई जिलों में सूखे तक की स्थिति हो जाती है. इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73% बोझ अकेले बिहार उठा रहा है यह हमारे साथ ज्यादती है, जिसे हम इस अभियान के माध्यम से बताना चाहते हैं.

संसद तक गूंजा मुद्दा, कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता रहे मौजूद

श्री कुशवाहा ने कहा कि मैं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने बड़ी मुस्तैदी से इस विषय को उठाया, इस विषय पर अखबारों में लिखा और अभी हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रयासों से आज यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है.

इस कार्यक्रम में मंच संचालन संजय सिंह ने किया. इस मौके पर मुख्य प्रभार शंभू कुशवाहा, जिला प्रभारी शिवनंदन सिंह, प्रदेश युवा अध्यक्ष नीतीश पटेल, अजय सिंह, संतोष कुशवाहा, राजीव रंजन, रंजीत झा, महानगर अध्यक्ष पंकज सिंह, रीना चौधरी, जितेंद्र कुमार जीबू, पूर्व में और संजय सिंह, विकास कुशवाहा, संजय कुमार, कुंदन कुमार सिन्हा और पिंटू, पंकज राय, अनीता मिश्रा, विनय सिंह, ब्रजकिशोर मेहता सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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By विपिन कुमार मिश्र

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