बेगूसराय की ऐतिहासिक चंद्रभागा नदी कभी जीवनरेखा हुआ करती थी, आज अपना अस्तित्व खो रही

Begusarai News : बेगूसराय के बखरी क्षेत्र की ऐतिहासिक चंद्रभागा नदी आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। कभी बाढ़ के दिनों में अपना रौद्र रूप दिखाने वाली और इलाके की जीवनरेखा कही जाने वाली यह नदी अब सूखकर मृतप्राय होने के कगार पर पहुंच गई है. प्रशासनिक उदासीनता, अतिक्रमण और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण नदी का स्वरूप लगातार सिमटता जा रहा हैं.

Begusarai News : (विकाश मिश्रा) बेगूसराय के बखरी क्षेत्र की ऐतिहासिक चंद्रभागा नदी आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। कभी बाढ़ के दिनों में अपना रौद्र रूप दिखाने वाली और इलाके की जीवनरेखा कही जाने वाली यह नदी अब सूखकर मृतप्राय होने के कगार पर पहुंच गई है. प्रशासनिक उदासीनता, अतिक्रमण और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण नदी का स्वरूप लगातार सिमटता जा रहा है। स्थानीय लोग अब इसके पुनर्जीवन की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं.

कभी तबाही लाती थी बाढ़, आज सूखी पड़ी है नदी

एक समय था जब चंद्रभागा नदी बरसात में अपने किनारे तोड़कर आसपास के क्षेत्रों में फैल जाती थी और बाढ़ का कारण बनती थी। बाढ़ नियंत्रण के लिए वर्षों पहले नदी के दोनों ओर बांध बनाए गए. इससे बाढ़ पर तो नियंत्रण हो गया, लेकिन धीरे-धीरे नदी का प्राकृतिक प्रवाह भी प्रभावित हो गया. आज स्थिति यह है कि नदी कई जगहों पर सूख चुकी है और उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है.

अंतिम संस्कार से जुड़ी रही है चंद्रभागा की पहचान

मुख्य बाजार के समीप बहने के कारण स्थानीय लोग वर्षों से अंतिम संस्कार के बाद अस्थि अवशेष इसी नदी में प्रवाहित करते रहे हैं। इसी वजह से क्षेत्र में इसे बोलचाल की भाषा में “चनहा नदी” भी कहा जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाली यह नदी आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।

वैदिक ग्रंथों में मिलता है नदी का उल्लेख

चंद्रभागा नदी का इतिहास बेहद प्राचीन माना जाता है। वैदिक कालीन ग्रंथों और पंचांगों में इसका उल्लेख मिलता है। दाह संस्कार संबंधी विवरणों में इसे “पापहारिणी” नदी की संज्ञा दी गई है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह नदी मंझौल स्थित काबर झील से निकलकर गढ़पुरा होते हुए बगरस के पास गंडक नदी में मिलती है.

अतिक्रमण और बारिश की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार कम वर्षा होने और नदी के किनारों पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण इसका जलस्तर लगातार घटता गया। कई जगहों पर लोगों ने नदी की जमीन पर खेती शुरू कर दी है. इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ और उसके पुनर्जीवित होने की उम्मीद भी कमजोर पड़ने लगी है.

Subheadline. नदी जोड़ो योजना से जग सकती है नई उम्मीद

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नदी जोड़ो योजना के तहत काबर प्रोजेक्ट के माध्यम से चंद्रभागा नदी की उड़ाही कर उसे गंडक नदी से जोड़ने की संभावना जताई गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना पर गंभीरता से काम हो तो नदी को नया जीवन मिल सकता है और क्षेत्र के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा.

Subheadline. पर्यावरणीय असंतुलन बना बड़ी वजह

पर्यावरणविदों के अनुसार जंगलों की कटाई, जैव विविधता में कमी और बदलते मौसम चंद्रभागा नदी के सूखने के प्रमुख कारण हैं. लगातार घटती वर्षा और बढ़ती आबादी के दबाव ने नदी की स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है.

पांच पंचायतों की पहचान है चंद्रभागा

करीब 15 किलोमीटर लंबी यह नदी बखरी नगर सहित घाघरा, मोहनपुर, बागवन, राटन और चकचनरपत पंचायतों से होकर गुजरती है. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि नदी का इतिहास लगभग 500 वर्षों पुराना है और यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है.

नदी बचाने की मांग हुई तेज

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से चंद्रभागा नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने, सफाई अभियान चलाने और पुनर्जीवित करने की मांग की है। पंकज चौरसिया, शंकर राय, चंदन चौरसिया, समीर श्रवण, हीरा राम, राजेश अग्रवाल, अमित कुमार देव और योगेंद्र राय समेत कई लोगों ने कहा कि यदि समय रहते ठोस पहल नहीं हुई तो क्षेत्र अपनी एक ऐतिहासिक धरोहर खो देगा.

चुनावी वादों में सीमित रह गया नदी के उद्धार का मुद्दा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर चुनाव में नेताओं द्वारा चंद्रभागा नदी के पुनर्जीवन का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा भुला दिया जाता है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि आखिर कब इस ऐतिहासिक नदी को नया जीवन मिलेगा.

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Published by: Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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